मेरठ के पीएल शर्मा जिला अस्पताल में 15 दिसंबर 2025 को एक चौंकाने वाली घटना घटी, जहां एक डॉक्टर के सहायक ने ‘भैया’ कहे जाने पर गुस्सा हो गया और भाकियू (भारतीय किसान यूनियन) के पदाधिकारी की 6 वर्षीय बेटी का इलाज रोक दिया। इसकी वजह से भाकियू कार्यकर्ताओं ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। आइए, पूरी घटना को स्टेप बाय स्टेप समझते हैं:
क्या हुआ था?
पीड़ित और कारण: भाकियू के जिला सचिव बिट्टू झंगेठी अपनी 6 साल की बेटी शिवांशी को सिरदर्द की शिकायत लेकर अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले गए। वहां डॉक्टर के सहायक कर्मचारी को बिट्टू ने ‘भैया’ कह दिया।
डॉक्टर की प्रतिक्रिया: सहायक कर्मचारी इससे भड़क गया। उसने बिट्टू को बुरे ढंग से डांटा, बच्ची का इलाज करने से इनकार कर दिया, पर्ची फेंक दी और अस्पताल गार्ड को बुला लिया। यहां तक कि 112 नंबर पर पुलिस बुलाने की धमकी भी दी, जिससे बच्ची और उसके पिता को OPD से बाहर निकालने की कोशिश की गई।
हंगामा का दौर: बिट्टू ने तुरंत भाकियू के जिला अध्यक्ष अनुराग चौधरी को सूचना दी। अनुराग सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ अस्पताल पहुंचे और अस्पताल प्रशासन में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद उन्होंने एसआईसी (अधीक्षक) डॉ. योगेश अग्रवाल के कक्ष में धरना शुरू कर दिया।
विरोध प्रदर्शन
भाकियू कार्यकर्ताओं ने डॉ. अग्रवाल के चैंबर में धरना दिया, जिससे अस्पताल में तनाव फैल गया। प्रदर्शन के दौरान शिवांशी को चक्कर आ गया और वह बेहोश हो गई, जिससे हंगामा और बढ़ गया।
किसानों ने डॉक्टर की अभद्रता और किसानों के प्रति असम्मान का आरोप लगाया। अनुराग चौधरी ने बताया कि सहायक कर्मचारी ने पर्चा फेंककर पुलिस बुलाने की कोशिश की, जो अस्वीकार्य है।
समाधान और बयान
तुरंत इलाज: बच्ची के बेहोश होने पर डॉक्टरों ने फौरन इलाज शुरू किया।
माफी: डॉ. योगेश अग्रवाल ने हाथ जोड़कर माफी मांगी और आश्वासन दिया कि भविष्य में किसानों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाएगा। साथ ही, अभद्रता करने वाले कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया।
समापन: माफी के बाद मामला शांत हो गया। भाकियू ने कहा कि वे किसानों के सम्मान की लड़ाई लड़ते रहेंगे।
यह घटना सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है, जहां लोग डॉक्टर की हरकत की निंदा कर रहे हैं। एक X पोस्ट में लिखा गया कि “कर्मचारी की अभद्रता से नाराज़ भाकियू जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी के नेतृत्व में किसानों ने धरना दिया। बाद में अस्पताल प्रभारी को हाथ जोड़कर मामला शांत करना पड़ा।”
यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं में मरीजों के सम्मान की कमी को उजागर करता है। अगर आपको वीडियो या और अपडेट चाहिए, तो बताएं!








