1857 की क्रांति के दौरान क्रांतिकारियों का मुख्य नारा “मारो “मारो फिरंगी को” था। यह नारा मंगल पांडे ने दिया था, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पहली बड़ी लड़ाई (1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम) में इस्तेमाल हुआ। इसका मतलब है “विदेशी (अंग्रेजों) को मारो”। यह सिपाहियों और विद्रोहियों के बीच दिल्ली, कानपुर और झांसी जैसे क्षेत्रों में युद्धघोष के रूप में गूंजा।
“वंदे मातरम” तो 1875-82 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखा गया था, लेकिन यह 1905 के बंग-भंग आंदोलन में लोकप्रिय नारा बना। इससे पहले 1857 में ही क्रांतिकारियों के पास यह आक्रामक नारा था, जो अंग्रेजों के खिलाफ सीधा विद्रोह दर्शाता था। हिंदू सैनिकों में “हर हर महादेव” जैसे धार्मिक उद्घोष भी सुनाई देते थे, लेकिन “मारो फिरींगी को” सबसे प्रसिद्ध था।
यह तथ्य कम जाना जाता है, क्योंकि आधुनिक चर्चा में बाद के नारे जैसे “इंकलाब जिंदाबाद” या “भारत माता की जय” ज्यादा याद किए जाते हैं। लेकिन इतिहासिक क्रम में, यह वंदे मातरम से पहले का प्रमुख नारा है।
यह तथ्य कम जाना जाता है, क्योंकि आधुनिक चर्चा में बाद के नारे जैसे “इंकलाब जिंदाबाद” या “भारत माता की जय” ज्यादा याद किए जाते हैं। लेकिन इतिहासिक क्रम में, यह वंदे मातरम से पहले का प्रमुख नारा है।







