नेताओं के बिगड़ते बोल

जिस किसी ने कहा सच कहा ‘तोल मोल के बोल’। और ये बोल तो उसके लिए और भी मायने रखती है जब वो सार्वजनिक जीवन में होता है। फिर भीड़ में कही बात और मीटिंग में कही बात में अंतर होता है।
पर ऐसा क्यों कि, नेता अपने में और अभिनेता में अंतर नहीं कर पाते। किसी फिल्म का गाना है मैं चाहिए करूं मैं चाहे वह करूं मेरी मर्जी कुछ इसी तरह हमारे नेता जो की जनता की प्रतिनिधि भी होते हैं और खास जिम्मेदारी वाले पदों पर भी लेकिन वह भी कुछ इसी अंदाज में होते हैं। मैं चाहे ये कहूं मैं चाहे वो करूं मेरी मर्जी… लोकसभा के अंदर कहूं लोकसभा के बाहर कहूं मेरी मर्जी लोकसभाध्यक्ष मुझे रोको नहीं, मुझे टोको नहीं, बाहर मुझे कोई रोके नहीं, ऐंकर मुझे टोके नहीं…। और ऐंकर टोकता नहीं। सत्तधारी दल भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने इसी 25 मई को कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत को रंडी (ग्रोक के अनुसार) की औलाद कहा। पिछले कुछ सालों में शायद ही ऐसा कोई चुनाव आया हो जिसमें नेताओं के बोल बिगड़े न हों और उन्होंने सामान्य शिष्टाचार भी नहीं निभाया। अभद्र और अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया। क्या हमारे नेता जिनको हम माननीय कहते हैं, अपना प्रतिनिधि चुनते हैं। इसीलिए चुनते हैं की प्रतिद्वंद्वी के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करें। वो ये नहीं सोचते कि इसका समाज पर क्या असर पड़ेगा? भावी पीढ़ी पर क्या असर पड़ेगा?
अब तो हाल यह हो गया कि शायद ही कोई भी चुनावी सभा हो, रैली हो उन्हें एक दूसरे को कोसना ही है। जिंदा रहने को वाले को तो हम कोसते ही रहे जो अब इस दुनिया में नहीं हैं उन्हें भी पानी पी-पी के गाली देते हैं। अब देखिए न देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को अब तक कोसा जा रहा है। कोसने की हालत यह हो गई है कि उनके चरित्र पर भी हमला किया जा रहा है। यही हाल विपक्ष और अन्य संगठनों के पदाधिकारी की हो गई है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेई और लालकृष्ण आडवाणी पर हमले तो हो रहे हैं। गनीमत यह है कि नौबत गाली-गलौज तक नहीं आई। और
और यहां तक की लोकसभा, राज्यसभा विधानसभाओं के सत्र जो बिना गाली गलौज के बीत गए हों तो ताज्जुब है! गर यही हाल रहा और चुनाव बिना गाली गलौज के संपन्न हो जाए तो शायद नहीं निश्चित ही आश्चर्य होगा!
नेताओं के बोल उनकी भाषा कब से बिगड़ी, किसने इसकी शुरुआत की इसका इतिहास तो मिलना संभव नहीं है हां इस पर शोध किया जा सकता है और किया भी जाना चाहिए ताकि पता तो चले कि दाल में काला है या पूरी दाल ही काली है। है तो किसकी वजह से है। अब ऐसा तो नहीं है कि नेता लोग यह गर्व करें या करने लगे कि हम जनप्रतिनिधि हैं, सर्वाधिकार संपन्न है। कुछ भी कहूं किसी को भी कहूं … संसद से सड़क तक कहूं।
याद करिए मुख्यधारा के मीडिया ने सत्ताधारी दल के किसी प्रवक्ता को फटकारते हुए रोका हो। संबित पात्रा, गौरव भाटिया और सुधांशु त्रिवेदी इसके उदाहरण हैं। वो बोलते हैं तो बोलते तो बोलते हैं और ऐंकर हां.. हूं ही करते हैं।
संसद के अंदर भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी में दानिश अली को एक नहीं कई बार काठमांडू और आतंकवादी कहा तथा बैठ जाने के लिए भी पर लोकसभा अध्यक्ष में उन्हें कुछ नहीं कहा, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की गई। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा ने विज्ञप्ति जारी कर कुछ नहीं कहा। बल्कि उन्हें किसी प्रदेश में चुनाव प्रभारी बना दिया गया। ध्यान देने वाली बात है यह कि सब लोकसभा के अंदर हुआ विपक्ष के साथ हुआ। स्मृति ईरानी ने राहुल पर अशोभनीय हरकत का आरोप लगाया, क्या वह साबित हुआ?
अल्पसंख्यक समुदाय के सांसद दानिश अली के प्रति क्यों कहा गया क्या वह ‘अमृत वचन’ था। उनके साथ लगातार अभद्रता हुई उनके दल के किसी वरिष्ठ सांसद ने उन्हें न रोका न टोका। किसी ने नहीं कहा लोकसभा अध्यक्ष या भाजपा अध्यक्ष माफ़ी मांगे‌। नवनिर्मित लोकसभा भवन में गोली मारो… वाले अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी के लिए कहा,’जिन्हें जात का पता नहीं वे जातिगत जनगणना की बात कर रहे हैं और इसके पहले लोकसभा में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मजाक करते हुए, खिल्ली उड़ाते हुए पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए कहा कि, वो कोट पहनकर नहाते हैं, तो संसद के भीतर ही कांग्रेस की नेता रेणुका चौधरी की हंसी की तुलना सूपर्णखा (राक्षस) से की गई‌‌। यही नहीं जो व्यक्ति राजनीति में नहीं है उसके लिए भी उसे 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड कहा गया तो प्रियंका गांधी के पति राबर्ट वाड्रा पर भी टिप्पणी की गई। कहावत है कि ‘ताली एक हाथ से नहीं बजती’ तो इस तरह की बातें सिर्फ और सिर्फ एक तरफ से ही नहीं कही गई दूसरे पक्ष ने पीएम मोदी को नाम लेकर या इशारा कर मौत का सौदागर कहा और चौकीदार चोर कहा तो सत्ता पक्ष ने इसका इस्तेमाल ढाल के रूप में करते हुए कहा मैं भी चौकीदार तमाम और मंत्रियों में भी उसे दोहराया।
तो सोनिया गांधी को कांग्रेस की विधवा कहा गया और राहुल गांधी को हाइब्रिड बछड़ा। खासकर गृह मंत्री अमित शाह राहुल गांधी को राहुल बाबा और शहजादे कह कर संबोधित करते थे। एक चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस शैली में ममता बनर्जी जी को कहा दीदी तो दीदी क्या उनकी बॉडी लैंग्वेज को सामान्य कहा जा सकता है?
और अंत में गालियां, अभद्र भाषा का प्रयोग वही करता है जिसके मन में दूसरे के प्रति अथाह न सही थोड़ी बहुत ही सही नफरत हो। पर ये राजनीति या नफरत की राजनीति किस ओर ले जाएगी ये किसी को भी नहीं पता। पर इसके लक्षण अच्छे नहीं।

  • Related Posts

    दिल्ली सीजेपी आंदोलन ने बनाई विशेष पहचान!
    • TN15TN15
    • July 22, 2026

    खाना-पानी की व्यवस्था के साथ ही व्यवस्थित रूप…

    Continue reading
    सरकार से दो-दो हाथ करने के मूढ़ में दिल्ली पहुंचा देश का युवा!
    • TN15TN15
    • July 21, 2026

    20 को दिल्ली में संसद मार्च के बाद…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    अस्पताल से सोनम वांगचुक ने सरकार को लिखी चिट्ठी, अनशन खत्म करने को तैयार, रखी शर्त

    • By TN15
    • July 22, 2026
    अस्पताल से सोनम वांगचुक ने सरकार को लिखी चिट्ठी, अनशन खत्म करने को तैयार, रखी शर्त

    दिल्ली सीजेपी आंदोलन ने बनाई विशेष पहचान!

    • By TN15
    • July 22, 2026
    दिल्ली सीजेपी आंदोलन ने बनाई विशेष पहचान!

    भारत में समंदर किनारे दबा था दुनिया का पहला बंदरगाह, 4000 साल तक यूरोप में भी नहीं था ऐसा पोर्ट, इतिहासकार ने खोली अंग्रेजों की झूठ की पोल

    • By TN15
    • July 22, 2026
    भारत में समंदर किनारे दबा था दुनिया का पहला बंदरगाह, 4000 साल तक यूरोप में भी नहीं था ऐसा पोर्ट, इतिहासकार ने खोली अंग्रेजों की झूठ की पोल

    ‘छात्राओं के साथ छेड़छाड़, पुलिस पर FIR की मांग’, CJP के आंदोलन पर HC में सुनवाई, आया बड़ा आदेश

    • By TN15
    • July 22, 2026
    ‘छात्राओं के साथ छेड़छाड़, पुलिस पर FIR की मांग’, CJP के आंदोलन पर HC में सुनवाई, आया बड़ा आदेश

    सोशलिस्ट स्टूडेंट्स यूनियन लखनऊ वि.वि. के छात्रों के धरने के समर्थन में

    • By TN15
    • July 22, 2026
    सोशलिस्ट स्टूडेंट्स यूनियन लखनऊ वि.वि. के छात्रों के धरने के समर्थन में

    पटना में कांग्रेस और BJP के कार्यकर्ताओं में मारपीट, सिर फटा, गाड़ी के शीशे तोड़े, भारी बवाल

    • By TN15
    • July 22, 2026
    पटना में कांग्रेस और BJP के कार्यकर्ताओं में मारपीट, सिर फटा, गाड़ी के शीशे तोड़े, भारी बवाल