ममता का ये दांव रणनीतिक, प्रतीकात्मक और व्यावहारिक है। पार्टी लीडर्स और विश्लेषण के मुताबिक, इसका मकसद है:लॉयल्टी रिवॉर्ड और ब्यूरोक्रेसी को मैसेज: 2026 विधानसभा चुनाव से पहले प्रशासनिक अधिकारियों को संकेत कि ममता अपने लोगों का साथ नहीं छोड़ती।
कानूनी और संसदीय फायरपावर: BJP के खिलाफ राज्यसभा में मजबूत आवाज, केंद्र की एजेंसियों (CBI/ED) के दुरुपयोग पर हमला।
प्रोग्रेसिव इमेज + स्टार पावर: महिला/युवा/समावेशी वोट बैंक को टारगेट, बंगाली गौरव के साथ राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को ब्रांड करना।
क्रॉसओवर और वोट बैंक: हिंदू-युवा वोटर्स को आकर्षित, ‘हिंदू-विरोधी’ टैग से छुटकारा।
प्रत्येक नाम पर दांव क्यों?
2014-19 में BJP सांसद रहे, 2021 में TMC जॉइन किया। अब बंगाल विधानसभा में हैं। RS भेजकर उन्हें दिल्ली वापस भेजा जा रहा है – वहां बाढ़, उद्योग, रोजगार जैसे बंगाल के मुद्दे उठाएंगे। साथ ही उनकी बाल्लीगंज सीट 2026 असेंबली के लिए खाली हो जाएगी। हिंदू वोटर्स और युवाओं को टारगेट, BJP से आए कार्यकर्ताओं को बांधने का प्लान।
राजीव कुमार (पूर्व डीजीपी, कोलकाता पुलिस कमिश्नर):
ममता के सबसे भरोसेमंद अफसर माने जाते हैं। सारदा-रोजवैली चिटफंड घोटाले की जांच में विवादित रहे, 2019 में CBI ने घर पर छापा मारा तो ममता ने 70 घंटे धरना दिया था (इसे ‘संविधान बचाने की लड़ाई’ कहा)। अब RS टिकट देकर लॉयल्टी का इनाम + प्रशासन को सिग्नल कि ममता अपने लोगों को संभालती है। BJP इसे ‘डर्टी सीक्रेट्स’ रखने का इनाम बता रही है।
मेनका गुरुस्वामी (सुप्रीम कोर्ट सीनियर एडवोकेट):
कोयल मल्लिक (टॉलीवुड स्टार):
BJP की प्रतिक्रिया
BJP ने हमला बोला है कि आधे उम्मीदवार ‘नॉन-बंगाली’ हैं (मेनका और बाबुल पर सवाल), और ममता ‘बंगाली प्राइड’ का नाटक करती हैं लेकिन बंगालियों को नजरअंदाज कर रही हैं। TMC इसे खारिज कर रही है।
कुल मिलाकर ममता का प्लान: सिर्फ 4 सीटें नहीं, बल्कि 2026 असेंबली और राष्ट्रीय राजनीति के लिए मजबूत बेस तैयार करना। लॉयल्टी, कानूनी ताकत, सेलिब्रिटी अपील और समावेशी मैसेज के जरिए TMC को ‘फाइटिंग फिट’ दिखाना। ये नाम विवादों में हैं, लेकिन ममता को भरोसा है कि ये पार्टी को मजबूत करेंगे।

