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आजम खान की रिहाई: 23 महीने बाद ‘आजाद’ सपा के कद्दावर नेता

उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज एक बड़ा मोड़ आ गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान 23 महीने की जेल यात्रा के बाद सीतापुर जेल से रिहा हो चुके हैं। 23 सितंबर को उनकी रिहाई हुई, जो उनके समर्थकों के लिए ‘आजादी’ का प्रतीक बन गई है। जेल से बाहर आते ही उन्होंने कार से हाथ हिलाकर अभिवादन किया, और उनके दोनों बेटे उन्हें लेने पहुंचे थे।

रिहाई का सफर: जमानत से आजादी तक

पृष्ठभूमि: आजम खान पर कुल 72 से अधिक मामलों में मुकदमे दर्ज थे, जिनमें रामपुर के क्वालिटी बार भूमि हड़पने का केस, जबरन बेदखली, नकली जन्म प्रमाण पत्र, हेट स्पीच और 2008 का सड़क जाम व संपत्ति क्षति का पुराना मामला शामिल थे।
हालिया अपडेट: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 18 सितंबर को क्वालिटी बार केस में जमानत दी, जो आखिरी लंबित मामला था। विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने पिछले हफ्ते 17 साल पुराने सड़क जाम केस में उन्हें बरी कर दिया। सभी मामलों में रिहाई के आदेश सीतापुर जेल पहुंच चुके थे।
देरी का कारण: सुबह 7-9 बजे रिहाई की उम्मीद थी, लेकिन जुर्माने की राशि जमा न होने से दोपहर 12-2 बजे तक देरी हुई। बाद में बॉन्ड जमा कर रिहाई पूरी हुई।
जेल प्रशासन की तैयारी: सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, और वाहनों की संख्या पहले से सूचीबद्ध थी।

राजनीतिक प्रभाव और अटकलें

आजम खान की रिहाई से उत्तर प्रदेश की सियासत गरमाने की पूरी संभावना है। 2027 विधानसभा चुनावों में उनका अनुभव सपा के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है, खासकर PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वोट बैंक में। समर्थक मानते हैं कि भाजपा की ‘बदले की राजनीति’ के बावजूद सपा मजबूत लौटेगी।
हालांकि, कुछ अटकलें हैं कि आजम खान बसपा में शामिल हो सकते हैं, लेकिन सपा नेताओं ने इसे खारिज किया है। उनके भाई शिवपाल सिंह यादव, सांसद रुचि वीरा और बेटे अब्दुल्ला आजम उनके साथ हैं। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर समर्थक उत्साहित हैं, जहां #AzamKhanRelease ट्रेंड कर रहा है।
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