नीतीश कुमार के डोर ढीली छोड़ते ही लपेटने में जुट गए कुछ लोग!

0
71
Spread the love

अपनी डफली, अपना राग!

दीपक कुमार तिवारी

पटना। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर जब से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विराजमान हुए हैं, पार्टी के भीतर ‘अपनी अपनी डफली, अपना राग’ अलापने का जैसे मौसम आ गया है। दावा करने का दौर तो ऐसे, जैसे उन्हें ही अधिकृत किया गया हो। मगर, अब जदयू के भीतर अंतर्विरोध को प्रकट करते कुछ नेता दिखने लगे हैं। वह भी तब जब जदयू 2020 विधानसभा चुनाव से बेहतर प्रदर्शन को आमादा दिख रही है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भरोसेमंद साथी मंत्री अशोक चौधरी के ‘भूमिहार प्रसंग’ पर बतौर मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ये कह गए कि अशोक चौधरी ने जदयू का निर्माण नहीं किया। नीतीश कुमार जाति की राजनीति कभी नहीं करते। अशोक चौधरी के जातिगत टिप्पणी पार्टी से अलग उनका निजी बयान हो सकता है। चलिए यहां तक तो सही है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता के नाते डिफेंड करना या पार्टी की मूल राजनीतिक चेतना को रखना समझ में आता है।
आचार्य किशोर कुणाल के बेटे और अपने दामाद साईं कुणाल को अशोक चौधरी विधानसभा चुनाव लड़ाना चाहते हैं। इस तरह के सवाल के जवाब में देते हुए मीडिया से जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार कहते हैं कि सायन कुणाल को विधानसभा का टिकट नहीं मिल सकता है। ये मेरा दावा है। अगर टिकट मिल जाता है तो एमएलसी के पद से इस्तीफा दे दूंगा। वे यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि अशोक चौधरी को हिम्मत है कि नीतीश कुमार के सामने ये प्रस्ताव रख सकें कि हम अपने दामाद सायन कुणाल को फलाने विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाना चाहते हैं। आप टिकट दे दीजिए। ये बात नीरज कुमार तब बोल रहे हैं, जब अशोक चौधरी ने ये सार्वजनिक मंच से कहा कि जिस इलाके में जाता हूं, चर्चा होने लगती है कि दामाद सायन कुणाल को विधानसभा चुनाव लड़ाना चाहते हैं। भाई सायन कुणाल अपने क्षेत्र में अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें वो करने दीजिए। राजनीति में क्यों घसीटते हैं!जहानाबाद की एक सभा में मंत्री अशोक चौधरी अप्रत्यक्ष रूप से जहानाबाद लोकसभा सीट पर जेडीयू उम्मीदवार चंदेश्वर चंद्रवंशी की हार के लिए भूमिहारों को दोषी ठहराया था। उनके निशाने पर अप्रत्यक्ष रूप से जगदीश शर्मा और राहुल शर्मा थे।
खैर, अपनी बात को जारी रखते अशोक चौधरी ने कहा था, ‘जो सिर्फ पाने के लिए नीतीश जी के साथ रहते हैं, हमें वैसे नेता नहीं चाहिए। पार्टी जब अति-पिछड़ा को उम्मीदवार बनाते हैं तो भूमिहार लोग भाग जाते हैं कि हम अति पिछड़ा को वोट नहीं देंगे। राजनीति करनी है तो मुद्दों के साथ राजनीति कीजिए। हमारे नेता ने जब फैसला कर लिया तो उस निर्णय के साथ खड़े रहिए। लेकिन टिकट नहीं मिलने पर जो नेता दिल्ली-बॉम्बे करते रहे, पार्टी ऐसे लोगों को चिन्हित कर चुकी है। ऐसे लोगों को पार्टी टिकट नहीं देगी।’
लोकसभा में जब वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पेश किया गया, तब जदयू से केंद्रीय मंत्री बने राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने साफ कहा कि ये संशोधन मुस्लिम विरोधी नहीं। ये बिल्कुल गलत बात है। आपकी मस्जिद से छेड़छाड़ का प्रयास नहीं किया जा रहा है। ये कानून से बनी संस्था को पारदर्शी बनाने के लिए है। कोई भी संस्था निरंकुश होगी तो सरकार को कानून बनाने का पूरा अधिकार है। इसकी तुलना मंदिर से करना गलत है। मैं इस बिल का समर्थन और स्वागत करता हूं।
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने जिस दिन सदन में वक्फ संशोधन विधेयक 2024 का न केवल स्वागत किया, बल्कि इसे मुस्लिम विरोधी होने से साफ-साफ इनकार किया। उसी दिन बिहार में कैबिनेट मंत्री जमा खान ने मुस्लिम समाज की नाराजगी की वजह को आलाकमान तक पहुंचा दिया था। फिर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह के नेतृत्व में शिया और शुन्नी वक्फ बोर्ड के पदाधिकारियों के साथ बैठक की गई। इस में जिन बिंदुओं पर वक्फ पदाधिकारियों को ऐतराज था, उसे जेपीसी में मजबूती से रखने का संकल्प लिया गया। ताकि वक्फ बोर्ड संशोधन पूरी तरह से मुस्लिम के हक-हुकूक की बात करे।
वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश अश्क मानते हैं कि जदयू के भीतर कड़क बयानबाजी तो हो रही है। जिसे देखिए निजी हित के साथ पार्टी फोरम पर बयान दिए जा रहा है। मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार के बयान हो या अशोक चौधरी के। कुछ अपना प्रकटीकरण ज्यादा था, पार्टी का कम। ऐसा करना जदयू के स्वास्थ्य को प्रभावित तो करेगा। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन को यू-टर्न लेना पड़ा। मंत्री अशोक चौधरी को बार-बार सफाई देनी पड़ी। इससे कहीं न कहीं पार्टी के भीतरी अनुशासन का ‘पता’ बता देता है। ये विधानसभा चुनाव को लेकर अच्छे संकेत तो नहीं कहा जा सकता।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here