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‘हिंदुत्व राष्ट्रवाद का एक और नमूना..’: छत्तीसगढ़ HC ने एक टिप्पणी की और RSS पर भड़क गए असदुद्दीन ओवैसी

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सरकारी स्कूलों में छात्रों को हिंदू प्रार्थना या मंत्रोच्चार करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने हाई कोर्ट की इसी टिप्पणी को ही आरएसएस के खिलाफ एक हथियार बनाने की कोशिश की है।

 

‘भारतीय राष्ट्रवाद के विपरीत हिंदुत्व राष्ट्रवाद’

 

हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के निर्देश वाली एक रिपोर्ट को एक्स पर टैग करते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि संघ परिवार जिस सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की बात करता है, वह असल में भारतीय राष्ट्रवाद से अलग है।

यह संघ परिवार के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, जो कि हिंदुत्व राष्ट्रवाद है, उसका एक और नमूना है, जो कि भारतीय राष्ट्रवाद के उलटा है।
असदुद्दीन ओवैसी, एआईएमआईएम चीफ

 

‘हिंदू प्रार्थना के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता’

 

दरअसल, गुरुवार को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों को सरकारी स्कूलों में हिंदू प्रार्थनाएं करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने एक रिट याचिका पर सुनवाई के बाद यह टिप्पणी की।
याचिकाकर्ता ने छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षा विभाग के 12 जून के सर्कुलर की संवैधानिक वैधता को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
दरअसल, बीजेपी शासित छत्तीसगढ़ सरकार ने सभी सरकारी स्कूलों को अगले शैक्षणिक सत्र से रोजाना वैदिक मंत्रों की प्रार्थना का निर्देश दिया था, जिसमें गायत्री मंत्र और सरस्वती वंदना भी शामिल है।
 

याचिकाकर्ता को दोबारा अदालत आने की छूट

 

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को जानकारी दी कि प्रशासनिक सर्कुलर को अभी तक किसी स्कूल में तामील नहीं किया गया है।
इस बात को ध्यान में रखकर की अभी तक किसी को जबरन हिंदू प्रार्थनाएं करने को मजबूर नहीं किया गया है, जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने याचिका का निपटारा कर दिया।
इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता को इस बात की छूट दी है कि अगर किसी बच्चे को इस तरह की धार्मिक प्रार्थनाओं के लिए मजबूर किया जाता है, तो वे दोबारा हाई कोर्ट के पास आ सकते हैं।

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