नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को बिहार के पूर्णिया जिले के बनमनखी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और लालू प्रसाद यादव पर जमकर निशाना साधा।
उन्होंने लालू-राबड़ी सरकार के दौर को ‘जंगलराज’ करार देते हुए कहा कि लालू राज में लूट-हत्या, फिरौती और अपहरण की इंडस्ट्री चलती थी। दिनदहाड़े एमएलए की हत्या तक हो जाती थी। यह बयान बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के प्रचार के दौरान आया, जहां शाह ने एनडीए के पक्ष में वोट मांगते हुए महागठबंधन को ‘जंगलराज की वापसी’ का खतरा बताया।
शाह ने कहा कि लालू-राबड़ी के शासनकाल में बिहार में अपराध चरम पर था, जहां लूट, हत्या, अपहरण और फिरौती जैसी घटनाएं आम थीं। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सराहना की कि उन्होंने इस ‘जंगलराज’ को खत्म किया, लेकिन चेतावनी दी कि आरजेडी इसे फिर से लाना चाहती है।
घुसपैठियों पर फोकस: शाह ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की ‘घुसपैठिया बचाओ’ यात्रा पर तंज कसा। उन्होंने वादा किया कि एनडीए सत्ता में आने पर बिहार से घुसपैठियों को चुन-चुनकर निकालेंगे और उनके अतिक्रमण को जमींदोज करेंगे, ताकि स्थानीय युवाओं को नौकरियां और गरीबों को राशन मिले। सिवान में शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा को टिकट देने का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि तेजस्वी ने टिकट बांटते वक्त ‘शहाबुद्दीन अमर रहे’ का नारा लगाया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार में अपराधियों की कोई जगह नहीं बचेगी।
घुसपैठियों पर फोकस: शाह ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की ‘घुसपैठिया बचाओ’ यात्रा पर तंज कसा। उन्होंने वादा किया कि एनडीए सत्ता में आने पर बिहार से घुसपैठियों को चुन-चुनकर निकालेंगे और उनके अतिक्रमण को जमींदोज करेंगे, ताकि स्थानीय युवाओं को नौकरियां और गरीबों को राशन मिले। सिवान में शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा को टिकट देने का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि तेजस्वी ने टिकट बांटते वक्त ‘शहाबुद्दीन अमर रहे’ का नारा लगाया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार में अपराधियों की कोई जगह नहीं बचेगी।
यह रैली बिहार चुनाव के अंतिम चरण की पूर्व संध्या पर हुई, जहां शाह ने सुपौल, कटिहार और पूर्णिया में कुल तीन सभाओं को संबोधित किया। राजनीतिक पृष्ठभूमि में, ‘लालू राज’ की आलोचना भाजपा का पुराना हथियार रहा है, जो उस दौर की कथित अराजकता (जैसे चारा घोटाला, अपराध दर में वृद्धि) को उजागर करती है। आरजेडी इसे ‘सामाजिक न्याय का दौर’ बताती है, लेकिन शाह का यह बयान चुनावी ध्रुवीकरण को तेज करने का प्रयास लगता है।






