होर्मुज में जारी टेंशन के बीच भारत ने रूस से मिलकर कर दिया खेल! 

अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकेबंदी के कारण दुनियाभर में तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐसे समय में भारत ने एक बड़ा और समझदारी भरा कदम उठाया है, ताकि उसे तेल की कमी का सामना न करना पड़े। भारत सरकार ने फैसला लिया है कि अब रूसी तेल लाने वाले जहाजों के लिए बीमा देने वाली रूसी कंपनियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। पहले 8 कंपनियों को अनुमति थी, अब इसे बढ़ाकर 11 कर दिया गया है। यह फैसला डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) ने लिया है।

ये कंपनियां जहाजों को खास तरह का बीमा देती हैं, जिसे P&I कवर कहा जाता है। यह बीमा बहुत जरूरी होता है, क्योंकि इसके बिना कोई भी जहाज अंतरराष्ट्रीय समुद्र में काम नहीं कर सकता. असल में, रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण यूरोप की बड़ी बीमा कंपनियों ने रूसी तेल ढोने वाले जहाजों को बीमा देना कम कर दिया था। इससे भारत के सामने समस्या खड़ी हो गई थी, क्योंकि वह बड़ी मात्रा में रूस से तेल खरीद रहा है। अब भारत ने रूसी कंपनियों को मंजूरी देकर इस परेशानी का हल निकाल लिया है।

 

कौन सी बड़ी कंपनियों को दी गई अनुमति?

 

दुनिया की कुछ बड़ी रूसी कंपनियों जैसे गज़प्रोम इंश्योरेंस और रोसगोस्त्राख को फरवरी 2027 तक काम करने की अनुमति दी गई है, वहीं VSK, सोगाज़ और अल्फास्ट्राखोवानी कंपनियों को 2030 तक की मंजूरी दी गई है। इससे साफ है कि भारत ने सिर्फ अभी की नहीं, बल्कि आने वाले कई सालों की तैयारी कर ली है। इसके अलावा कुछ और कंपनियों को भी शामिल किया गया है और दुबई स्थित इस्लामिक प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी क्लब  कंपनी को फरवरी 2027 तक सेवाएं देने की अनुमति दी गई है, ताकि विकल्प ज्यादा हों और किसी एक पर निर्भरता कम हो।

 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव

यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ा हुआ है। यह रास्ता दुनिया के लिए बहुत अहम है, क्योंकि बड़ी मात्रा में तेल इसी रास्ते से आता-जाता है। अगर यहां रुकावट आती है तो इसका असर भारत जैसे देशों पर सीधे पड़ता है. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयात करने वाला देश है और हाल के समय में उसने रूस से सस्ता तेल खरीदना बढ़ाया है। ऐसे में यह जरूरी था कि तेल लाने में कोई रुकावट न आए। भारत का यह कदम एक तरह से सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा। इससे तेल की सप्लाई बनी रहेगी और देश की ऊर्जा जरूरतें बिना रुकावट पूरी हो सकेंगी।

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