राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन (उप सभापति) और जनता दल-यूनाइटेड (जेडी-यू) के वरिष्ठ नेता हरिवंश नारायण सिंह का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने बुधवार को चेयर से कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और डिप्टी चेयरमैन हरिवंश समेत 25 राज्यों के 59 सदस्य कार्यकाल पूरा कर रहे हैं।
हरिवंश नारायण सिंह का जन्म 30 जून 1956 को यूपी के बलिया में हुआ। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा गांव से सटे टोला काशी राय स्थित स्कूल से शुरू की। उसके बाद जेपी इंटर कालेज सेवाश्रम (जयप्रकाशनगर) से 1971 में हाईस्कूल पास करने के बाद वे वाराणसी पहुंचे। यूपी कॉलेज से इंटरमीडिएट और उसके बाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट किया और पत्रकारिता में डिप्लोमा की डिग्री हासिल की। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टाइम्स ग्रुप से की थी।
बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी
1981-84 तक हैदराबाद और पटना में बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी की और साल 1984 में इन्होंने पत्रकारिता में वापसी की। अक्तूबर 1989 तक आनंद बाजार पत्रिका समूह से प्रकाशित रविवार साप्ताहिक पत्रिका में सहायक संपादक की भूमिका निभाई। 1990 के दशक में वो बिहार के एक बड़े मीडिया प्रभात खबर से जुड़े, जहां पर उन्होंने 2 दशक से ज़्यादा समय तक काम किया। इसी दौरान वो नीतीश कुमार के करीब आए, इसके बाद नीतीश ने हरिवंश को जेडीयू का महासचिव बना दिया।
पहली बार पहुंचे संसद
2014 में जेडीयू ने हरिवंश को राज्यसभा के लिए नामांकित किया और इस तरह वो पहली बार संसद पहुंचे। हरिवंश अप्रैल 2014 से राज्य सभा के सांसद हैं। उनका दूसरा कार्यकाल इसी साल अप्रैल में समाप्त हो रहा है। उन्हें राज्य सभा के 2 कार्यकाल मिल चुके हैं। इसके अलावा वे 9 अगस्त 2018 को राज्यसभा के उपसभापति चुने गए और 9 अप्रैल 2020 तक इस पद पर रहे. इसके बाद 14 सितंबर 2020 को फिर से वो इस पद पर चुने गए और अभी इस पद पर बने हुए हैं।
नीतीश के बेहद करीबी
हरिवंश नीतीश कुमार के काफी करीबी माने जाते हैं। 2018 में जब उन्हें उपसभापति बनाने का प्रस्ताव बीजेपी की ओर से आया तो नीतीश कुमार ने इसका समर्थन किया। उनके पक्ष में नवीन पटनायक और जगन मोहन रेड्डी से वोट भी मांगे. जेडीयू सूत्रों के अनुसार हरिवंश को ये पद जेडीयू कोटे से नहीं दिया गया था, लेकिन अगस्त 2022 में जब नीतीश कुमार ने एनडीए से अलग होकर महागठबंधन के साथ सरकार बनाई तब सबकी नजरें हरिवंश पर लगीं कि वे इस्तीफा देंगे या नहीं। तब उन्होंने संवैधानिक पद पर विराजमान होने का हवाला देकर इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था।
नीतीश के नजदीक रहे हरिवंश बीजेपी के काफी नजदीक आ चुके हैं। जेडीयू के बीजेपी से अलग होने के बावजूद अपने पद से इस्तीफा न देकर वो बीजेपी नेतृत्व की नजरों में आ गए थे। विपक्ष के बहिष्कार के बावजूद उन्होंने नए संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में न सिर्फ हिस्सा लिया बल्कि प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ की थी।