चरण सिंह
सपा मुखिया अखिलेश यादव अयोध्या हार पर दुखी हो रहे हैं और भारत में भी नेपाल जैसे हालात होने की आशंका व्यक्त कर कर रहे हैं। कुंदरकी सीट पर भी वह सपा की हार पर योगी सरकार को घेर चुके हैं। अखिलेश यादव को लगता है मुसलमान, दलित और ओबीसी उनका वोटबैंक है। अखिलेश यादव यह नहीं बताते कि आखिर ये लोग सपा को वोट क्यों दें ?
अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी पार्टी के मुखिया हैं। पर सड़कों पर उतरने को तैयार नहीं। योगी सरकार का दूसरा कार्यकाल चल रहा है। समाजवादी पार्टी ने विपक्ष की भूमिका निभाते हुए ऐसा कौन सा काम किया है जिसके लिए उन्हें लोग वोट दें। समाजवादी पार्टी ने कौन सा बड़ा आंदोलन जनहित में किया है ? अखिलेश यादव ट्वीट कर देते हैं और उनका काम पूरा।
यदि बीजेपी वोट चोरी करा रही है तो फिर अखिलेश यादव अपने कार्यकर्ताओं को सड़कों पर क्यों नहीं उतारते ? अक्सर अखिलेश यादव की भाषा ऐसी होती है कि जैसे उनको को थाल में सजाकर सत्ता दे दे। कभी वह कहते हैं अब तो योगी नोएडा आ गए अब तो गई योगी सरकार। कभी वह लोकसभा में कहते हैं कि आपको पता है कि उत्तर प्रदेश में आपको किसने हरवाया है। मतलब सपा को जो 37 सीटें लोकसभा चुनाव में मिली हैं। वे बीजेपी में गुटबाजी के चलते मिली हैं। बीजेपी ने दिलवाई हैं।
देखने में आ रहा है कि अखिलेश यादव सपा को ऐसे चला रहे हैं जैसे कि मायावती बसपा को चलाती हैं। बसपा विपक्ष में कभी आंदोलन नहीं करती। ऐसे ही अखिलेश यादव की सपा में आंदोलन होने बंद हो गए हैं। मुलायम यादव के समय में विधानसभा, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर समाजवादी पार्टी में तमाम कार्यक्रम हुआ करते थे। आज की तारीख में समाजवादी पार्टी में न तो आंदोलन हो रहे हैं और न ही सम्मेलन। अखिलेश यादव समाजवाद की बात करना भी भूल गए हैं। बस पीडीए का राग अलाप रहे हैं।
अखिलेश यादव नेपाल जैसे क्रांति भारत में होने की बात तो कर रहे हैं पर वह यह नहीं समझ रहे हैं कि नेपाल में क्रांतिकारियों ने न तो सत्ता पक्ष के नेताओं को बख्शा और न ही विपक्ष के नेताओं को। नेपाल के युवाओं का गुस्सा इस बात को लेकर अधिक था कि नेताओं के बच्चे विदेश में पढ़ते हैं। मौज मस्ती काट रहे हैं। उनके लिए न तो रोजगार है न ही संसाधन। नेता मतलब सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों।

