अभेद्य किला सुरक्षित रहा, लेकिन जीत का मार्जिन घटा
एनडीए के वोट बैंक में हुई सेंधमारी
राम विलास
राजगीर। कौशलेंद्र कुमार नालंदा लोकसभा सीट से चुनाव जीत गये हैं। एक लाख 66 हजार से अधिक मतों से चुनाव जीतकर कौशलेन्द्र कुमार ने जदयू के इस अभेद्य किला को सुरक्षित रखा है। नालंदा के संसदीय इतिहास में लगातार चौथी बार चुनाव जीतकर उन्होंने नया इतिहास रचा है। लेकिन पिछली बार से इस बार उनके जीत के आंकड़े में गिरावट हुई है। किन कारणों से वोट के आंकड़े कम हुये हैं। यह मंथन का विषय है।
एनडीए के वोट को एकजुट करने में कौशलेन्द्र कुमार उतने सफल नहीं हुये हैं, जितना उन्हें होना चाहिए था। वहीं उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी एनडीए के वोट बैंक में सेंधमारी करने में सफल रहे हैं, जिसके कारण जीत का आंकड़ा उम्मीद के विपरीत है। महादलित वोट बैंक एनडीए की मानी जाती है। लेकिन इस चुनाव में महादलित का बड़ा वोट एनडीए से छिटक गया।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद जीतनराम मांझी के सामाजिक समीकरण का लाभ भी एनडीए कैंडिडेट को नहीं मिला है। उस वोट बैंक में कौशलेन्द्र कुमार के प्रतिद्वंद्वी सेंधमारी करने में सफल रहे हैं। इतना ही नहीं एनडीए वोट में बिखराव के लिए नालंदा में अफवाह उड़ाई गयी कि हाजीपुर संसदीय क्षेत्र में कुर्मी जाति द्वारा लोजपा को वोटिंग नहीं किया गया है। उस अफवाह का असर भी जीत की मार्जिन को कम किया है।
एनडीए के एक धड़ा के नाराजगी का खामियाजा भी सांसद को सहना पड़ा है। एक जाति विशेष के वोट बैंक में दरार हो गया। दरार के एक तरफ के लोग एनडीए के साथ रहकर कौशलेन्द्र कुमार का समर्थन किया, तो दूसरी तरफ के लोगों द्वारा एनडीए के प्रतिद्वंद्वी को वोट पोल किया गया। बुद्धिजीवियों की माने तो मौर्य काल के बाद नालंदा का सबसे अधिक विकास मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में हुआ है।
पहले नालंदा में केवल प्राथमिक विद्यालय से लेकर डिग्री काॅलेज तक की शिक्षा व्यवस्था थी। लेकिन नीतीश कुमार के काल में मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, उद्यान महाविद्यालय, नालंदा विश्वविद्यालय, नालंदा खुला विश्वविद्यालय, काॅलेजों में स्नातकोत्तर की पढ़ाई, पॉलिटेक्निक कॉलेज, चार- पांच आईटीआई, सीआरपीएफ प्रशिक्षण केन्द्र, बिहार पुलिस अकादमी जैसी उच्च कोटि की शिक्षण- प्रशिक्षण संस्थानें हैं।
खेल विश्वविद्यालय और खेल अकादमी का शुभारंभ होने वाला है। पर्यटन के क्षेत्र में भी आशातीत उपलब्धि हासिल है। नेचर सफारी, ग्लास ब्रिज, जू सफारी, केविन रोपवे, घोड़ाकटोरा झील, इक्को पार्क आदि इसके उदाहरण हैं। राजगीर- बख्तियारपुर और इस्लामपुर- फतुहा डेड रेलवे लाइन को पुनर्जीवित करने का श्रेय भी नीतीश कुमार की ही है।
नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे भी उन्हीं की देन है। इतना विकास और उपलब्धि के बाद भी जीत का यह अंतर नाकाफी प्रतीत होता है। यह सत्य है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीति, नेतृत्व, निर्णयों और विकास पर नालंदा के मतदाताओं के विश्वास की मुहर लगाया है। बावजूद नालंदा में एनडीए वोट बैंक एकजुट नहीं रह सका। यह चिंतनीय है।
इतना विकास के बाद भी छोटी मोटी बातों को लेकर जातीय समीकरण के आधार पर विरोध कहीं से उचित नहीं है। चुनाव जीतने के लिए विकास नहीं, जातीय समीकरण जुटाना आश्चर्य से कम नहीं है। लोकसभा चुनाव में एनडीए के वोट बैंक में सेंधमारी जिले के कई विधायकों के होश उड़ा दिये हैं। विपक्ष का यही गोलबंदी और सेंधमारी की प्रवृत्ति आगे भी रही तो कई विधानसभा क्षेत्र में चौकाने वाले रिजल्ट हो सकते हैं।

