आखिर अजित डोभाल किससे प्रतिशोध लेने के लिए युवाओं का आह्वान कर रहे हैं ?

देश में जरूरत तो युवाओं को एकजुटता दिखाकर देश को मजबूती देने की है

चरण सिंह
जब दुनिया में प्रभावशाली देश अपने रुतबे और धंधें को बढ़ाने के लिए हर नियम कानून को ताक पर रखकर कमजोर देशों को कब्जाने में लग गए हैं। जब दुनिया के अधिकतर देशो में अस्थिरता फैली हुई है। जब भारत चारों ओर से दुश्मनों से घिरा हुआ है। जब देश को एकजुट होकर एक साथ खड़े होने की जरूरत है। ऐसे में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल युवाओं से इतिहास का प्रतिशोध लेने की बात कर रहे हैं। आखिर अजित डोभाल डोभाल किनसे प्रतिशोध लेने की बात कर रहे हैं ? वैसे तो भारत का इतिहास बहुत पुराना है पर अजीत डोभाल ने जो भाषण के कार्यक्रम में दिया है वह भारत पर आक्रमण, मुग़ल शासन और अंग्रेजी शासन से जुड़ा है।
डोभाल जी जिस मोहम्मद गजनवी सोमनाथ मंदिर लूटा वह अफगानिस्तान से आया था। मोहम्मद गोरी भी अफगानिस्तान से आया था। मुग़ल शासन की नींव डालने वाला बाबर मध्य एशिया के फ़रग़ना घाटी अब जो उज़्बेकिस्तान है, से आया था और  तैमूर व चंगेज़ ख़ान का वंशज था। अंग्रेज इंग्लैंड से आये थे। आखिर अजित डोभाल किस देश और किनसे  प्रतिशोध लेने की बात कर रहे हैं ? वैसे किसी देश से तो प्रतिशोध सरकार ही ले सकती है और सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खुद अजित डोभाल हैं।
युवाओं में तो देशभक्ति जगाकर देश पर मर मिटने के लिए तैयार किया जा सकता है। मतलब आने आने वाले खतरों के प्रति तैयार किया जा सकता है। आखिर अपने ही देश में युवा किससे प्रतिशोध लें ? अजित डोभाल मंदिरों को तोड़ने की बात कर किस इतिहास को किन युवाओं से प्रतिशोध लेने की बात कर रहे हैं ? अजीत डोभाल ने युवाओं से प्रतिशोध लेने की बात करते हुए आज़ादी की लड़ाई में कुर्बानी देने की बात की वह कुर्बानी देश की हर जाति और धर्म ने दी है।  डोभाल को आज़ादी की कीमत को याद दिलाते हुए यह भी बताना चाहिए कि यह हमारे संविधान और लोकतंत्र की खूबसूरती है कि जिस विचारधारा के लोग आज़ादी की लड़ाई का विरोध कर रहे थे।.उनको भी राज करने का मौका मिला है।  ऐसे में डोभाल को यह भी बताना चाहिए कि आख़िरकार ये युवा किससे प्रतिशोध लें। अजित डोभाल मंदिरों की बात तो कर रहे हैं पर शिक्षण संस्थानों के साथ ही चिकित्सा संस्थानों का जो कबाड़ा हो रहा है उसके जिम्मेदार लोगों से प्रतिशोध कौन लेगा ? जो लोग देश की एकता और सम्प्रभुता को तार तार कर  रहे हैं उनसे प्रतिशोध कौन लेगा। क्या अजीत डोभाल ने मालूम नहीं है कि वोटबैंक  के लिए राजनीतिक दलों ने युवाओं को तो पहले ही बांट दिया है। एक दूसरे के मन में नफरत का जहर घोल दिया है। दरअसल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल एक कार्यक्रम में युवाओं से “इतिहास का प्रतिशोध लेने की बात की है। अजित डोभाल ने कहा था, “इतिहास हमें एक चुनौती देता है। हर युवक के अंदर वो आग होनी चाहिए। प्रतिशोध शब्द अच्छा तो नहीं है, लेकिन प्रतिशोध भी अपने आप में बड़ी भारी शक्ति होती है। हमें अपने इतिहास का प्रतिशोध लेना है। अजित डोभाल ने  विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग- 2026 में मौजूद युवा दर्शकों से मंच से कहा, “आप बहुत भाग्यवान हैं कि आप उस भारत में पैदा हुए, जो स्वतंत्र है। भारत हमेशा ऐसा नहीं था, जितना स्वतंत्र आपको दिखाई देता है। हमारे पूर्वजों ने इसके लिए बहुत क़ुर्बानियाँ सहन की हैं। बहुत अपमान सहन किए हैं। असहायता के दौर से गुज़रे हैं। कई लोगों को फांसी हुई है।  भगत सिंह को फांसी के फंदे को स्वीकार करना पड़ा। सुभाष चंद्र बॉस को जीवनभर संघर्ष करना पड़ा। महात्मा गांधी को सत्याग्रह करना पड़ा और अनगिनत लोगों को जान देनी पड़ी है। यह बात डोभाल ने आज़ादी की लड़ाई से जोड़ते हुए बोली है। आज़ादी की लड़ाई की कीमत की जो उन्होंने बात की है उसकी सराहना होनी चाहिए पर राजतंत्र पर जाकर युवाओं को जाति और धर्म के आधार पर बांट दिया। ठीक है देश के युवा प्रतिशोध के लिए तैयार हों पर डोभाल के बेटे भी तो युवा हैं। क्या उनको प्रतिशोध नहीं लेना चाहिए ? उनके बेटे क्या विदेश में जाकर प्रतिशोध लेंगे ? अपने बेटे को डोभाल ने विदेशी नागरिकता दिला रखी है और देश के युवाओं से प्रतिशोध लेने क बात कर रहे हैं।

अजीत डोभाल ने यह जो कहा कि हमारे गांव जले, हमारी सभ्यता को समाप्त किया गया, हमारे मंदिरों को लूटा गया। मतलब यह उन्होंने मुगलों के शासन को लेकर कहा। ऐसे में आज़ाद भारत में युवा किनसे प्रतिशोध लें ? और कौन से युवा प्रतिशोध लें ?
अजीत डोभाल कहते हैं कि इतिहास ने हमें एक सबक़ सिखाया। क्या हमने वह सबक़ सीखा ? क्या हम उस सबक़ को याद रखेंगे? अगर आने वाली पीढ़ियाँ उस सबक़ को भूल जाएंगी, तो यह इस देश की सबसे बड़ी ट्रेजडी होगी। आखिकरकार डोभाल युवाओं को क्या याद रखने की बात कर रहे हैं। अंग्रेजी शासन या फिर मुग़ल शासन। मुग़ल शासन तो राजतंत्र में था। वह वर्चस्व की लड़ाई थी सभी राजा अपने राज के लिए लड़ रहे थे। यह भी जमीनी हकीकत है कि अधिकतर हिन्दू राजाओं के सेनापति मुसलमान और मुग़ल शासकों के सेनापति हिन्दू थे। ऐसे में यदि इन मुगलों की हिन्दुओं की सभ्यता को नष्ट किया है। मंदिरों को तोड़ा है तो फिर ये हिन्दू सेनापति तो मुग़ल शासकों से ज्यादा जिम्मेदार थे ? फिर युवा किनसे प्रतिशोध लें ?

डोभाल ने मौजूदा नेतृत्व की तारीख की है। उनका कहना था कि आज हम बहुत भाग्यशाली हैं कि हमारे देश में ऐसा नेतृत्व है। एक ऐसा लीडर है, जिसने 10 वर्षों में देश को कहां से कहां पहुंचा दिया। जबकि पुलवामा आतंकी हमले के बाद पहलगाम आतंकी हमले के बाद सरकार विदेशी मोर्चे लगातार विफल साबित हो रही है। वह बात सीज फायर को लेकर भी देखी गई। वह बात अमेरिका की गीदड़ भभकी के मामले में भी देखी गई। वह बातचीत के साथ संबंधों को लेकर भी देखी गई।

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