चरण सिंह
देश में सवाल उठ रहा है कि विपक्ष को भाजपा से इतनी दिक्कत नहीं है कि जितनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है। मतलब इंडिया गठबंधन के सभी दल चाहते हैं कि मोदी अब प्रधानमंत्री नहीं बनने चाहिए। क्या मोदी के खिलाफ बस विपक्षी दल ही हैं ? क्या बीजेपी में सभी नेता मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के पक्ष में हैं ? यदि यह प्रश्न किया जाएगा तो जवाब अपने आप मिल जाएगा कि बीजेपी में भी ऐसे कितने नेता हैं मोदी के फिर से प्रधानमंत्री बनने के पक्ष में नहीं हैं। दरअसल प्रधानमंत्री नरंेद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने बीजेपी में ऐसी व्यवस्था कर रखी है कि सब कुछ इन दोनों नेताओं ने ही कब्जाया हुआ है। यही वजह है कि पार्टी में दूसरी नंबर के नेता माने जाने वाले रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी तमाम अपमान झेलकर मोदी की महिमामंङित करते रहते हैं। हां यह जरूर कहा जा सकता है कि बीजेपी में तीन ऐसे नेता हैं जो मोदी और अमित शाह के किसी दबाव में नहीं आते हैं। ये नेता केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सुब्रमण्यम स्वामी हैं। सुब्रमण्यम तो खुलेआम मोदी को ललकारते रहते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज चौहान, वसुंधरा राजे, रमन सिंह दबी जुबान मोदी और अमित शाह से नाराज हैं।
अंदर की खबर है कि चार जून को मतगणना के दिन यदि एनडीए की सीटें बहुमत के आंकड़े से कम आती हैं तो ये सभी चेहरे मुखर हो सकते हैं। या यह कह सकते हैं कि यदि एनडीए को बहुमत नहीं मिलता है तो फिर मोदी के खिलाफ विद्रोह भी हो सकता है। दरअसल मोदी और अमित शाह ने आरएसएस की नसीहत भी नहीं मानी। आरएसएस चाहता रहा है कि हर चुनाव मोदी के चेहरे पर न लड़ा जाए पर बीजेपी में मोदी और अमित शाह के सामने बोलने की हिमाकत कौन करेगा ? आरएसएस बोलता रहा है और ये दोनों उसकी बातों की अनदेखी करते रहते हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐसे ही नहीं बोला है कि यदि मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बनते हैं तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके पद से हटाया जा सकता है। इस बात को हवा इसलिए भी मिल रही है कि क्योंकि योगी आदित्यनाथ के सामने मोदी और अमित शाह की एक नहीं चलती है। या यह कहें कि योगी इन दोनों नेताओं के दबाव में नहीं आते हैं। नितिन गडकरी भी मोदी और अमित शाह पर मुखर रहते हैं। सुब्रमण्यम स्वामी तो मोदी के खिलाफ बोलने में कोताही नहीं बरतते।
विपक्ष तो यह मान ही रहा है कि तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर मोदी किसी को बख्शने वाले नहीं हैं। ऐसे ही बीजेपी में जो नेता उनकी लॉबी में नहीं हैं वे बखूबी जानते हैं कि फिर से उनकी सरकार बनने पर उनका कोई वजूद मोदी नहीं रहने देंगे। ऐसे में बीजेपी की बहुमत से कम सीटें रहने पर ये सभी नेता मोदी के विरोध में खड़े दिखाई देंगे। मतलब जैसे मोदी है तो मुमकिन है का नारा बीजेपी ने दिया है। ऐसे ही बीजेपी की सीटें कम रहने पर मोदी का प्रधानमंत्री बनना भी नामुमकिन है। दरअसल बीजेपी के नेता भी जानते हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने की बात करने वाले मोदी विपक्ष के कितने भ्रष्ट नेताओं को बीजेपी में ले आये। ये नेता भी जानते हैं कि मोदी का भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गारंटी का नारा खोखला है। ऐसे में यह बात भी सामने आ रही है कि बीजेपी की सीटें कम रहने पर वह सांसदों की खरीद-फरोख्त कर सकते हैं। ऐसे में बीजेपी नेता नहीं चाहते कि खरीद फरोख्त कर बीजेपी की सरकार बने।







