10 तारीख को जंतर मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त की कारगुजारियों के खिलाफ होने वाले प्रदर्शन के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने दिल्ली के शहरियों को धमकी भरे अंदाज में हिदायत दी है कि वे प्रदर्शन में शामिल न हो, घर से बाहर न निकले, इसके साथ यह भी लिख दिया गया कि उस दिन 23 000, CAPF के तथा 15000 दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त जवान वहां पर तैनात रहेंगे। पूरी दिल्ली में खुफिया कैमरे, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड पर खास निगरानी रहेगी।
इस मुनादी से सरकार का इरादा साफ जाहिर हो रहा है, कि उस दिन वह लाठी डंडे, टियर सेल, और गोली भी चला सकती है। जब दूसरे हथकंडों से वह जायज मांग करने वालों की आवाज को ना दबा, डरा पाई, तो अब नंगे रूप में अपने डंडे की ताकत से खौफ पैदा करने की कोशिश कर रही है। एक डरी हुई सरकार और कर ही क्या सकती है। भाजपा की सरकार अपने दिन भूल गयी जब 75 में आपातकाल लगा था क्या उससे ज्यादा खौफ यह पैदा कर पा रहे हैं? गद्दीनशीं होने के गरुर में, लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली के लिए होने वाले जन आंदोलन के इतिहास से लगता है कि ये नावाकिफ हो गए हैं। जितना सरकारी जुल्म बढ़ेगा इंकलाब का सैलाब उतना ही तेजी से हुंकार भरेगा। अभी भी वक्त है की सरकार को अपने नकली घमंड को छोड़कर, एक मामूली कारिंदा जो उसके हुकुम का गुलाम है, हालांकि लोकतंत्र की हत्या उसने इनके कहने पर ही की है, उसको कहें श्रीमान अपने आप से इस्तीफा देकर अपनी भी जान बचाओ और सरकार को भी वक्ती तौर पर थोड़ी राहत मिले का पैगाम दे।
– राजकुमार जैन






