हर हाथ में तिरंगा, हर गली जंतर-मंतर
हमारी निर्णायक मांगें:
अवैध एसआईआर रद्द करो!
ज्ञानेश कुमार को हटाओ और उन पर मुकदमा चलाओ!
हमारी मतदाता सूची को नए सिरे से दुरुस्त करो!
सभी नागरिकों के मतदान के अधिकार बहाल होने तक एकजुट संघर्ष की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय निर्वाचन आयोग का दुरुपयोग करके एसआईआर के जरिए 13.41 करोड़ नागरिकों के मतदान के अधिकार छीन लिए हैं। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के तहत प्रपत्र-6 जैसे वैधानिक प्रपत्रों में संशोधन संसद के समक्ष प्रस्तुत करना आवश्यक है। ऐसा किए बिना मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रपत्रों में बदलाव करके वास्तविक नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए, ताकि भाजपा को सत्ता में बनाए रखा जा सके। यह संविधान का उल्लंघन है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकार किया है कि उसने निर्वाचन आयोग को प्रपत्र-6 में बदलाव करने की अनुमति नहीं दी थी। इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय के पास स्वयं भी ऐसा करने का अधिकार नहीं है। ज्ञानेश कुमार ने संविधान के प्रति अपनी शपथ का उल्लंघन किया है और उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। लेकिन प्रधानमंत्री स्वयं इस अपराधी को संरक्षण दे रहे हैं। नियमावली में औपचारिक बदलाव करने का एकमात्र अधिकार संसद के पास है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संसद द्वारा महाभियोग के जरिए पद से हटाए बिना प्रधानमंत्री इस गंभीर संवैधानिक गतिरोध से बाहर नहीं निकल सकते।
लोकतंत्र की पुनर्बहाली के लिए जनता का मार्च — जनता–एसआईआर के खिलाफ द्वारा आहूत पहला जमीनी संघर्ष— देश की जनता के उस एकजुट संघर्ष की शुरुआत है, जो तब तक जारी रहेगा, जब तक ज्ञानेश कुमार पर मुकदमा नहीं चलाया जाता, अवैध एसआईआर रद्द नहीं किया जाता, भारत के प्रत्येक वास्तविक नागरिक का मतदान का अधिकार बहाल नहीं किया जाता और निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 में संशोधन नहीं किया जाता। हम अपना लोकतंत्र वापस हासिल करेंगे!
जनता–एसआईआर के खिलाफ सभी नागरिकों से आह्वान करता है कि वे 23 अक्टूबर, 2026 को लोकतंत्र की पुनर्बहाली के लिए जनता के मार्च में शामिल हों। हाथों में तिरंगा लेकर जिला एवं तहसील मुख्यालयों, राज्य की राजधानियों और राष्ट्रीय राजधानी में मार्च करें तथा मोदी–शाह शासन के अधिनायकवाद के खिलाफ जनता की एकता का प्रदर्शन करें। सभी जन एवं वर्ग संगठन तथा नागरिक समाज के मंच इस शांतिपूर्ण जुटान में सक्रिय रूप से लोगों को लामबंद करेंगे और भाग लेंगे। यह संघर्ष उन लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए है, जिन्हें ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता की लड़ाई में अनगिनत वीरों के बलिदान से हासिल किया गया था।
जनता की संसद, संकल्प और राष्ट्रगान -जनता–एसआईआर के खिलाफ किसानों, मजदूरों, दिहाड़ी श्रमिकों, व्यापारियों, उद्यमियों, पत्रकारों, वकीलों, शिक्षकों, कर्मचारियों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों, महिलाओं, युवाओं, विद्यार्थियों, आदिवासियों, दलितों, अल्पसंख्यकों — समाज के सभी वर्गों — से लोकतंत्र की पुनर्बहाली के संघर्ष में शामिल होने का आह्वान करता है। मोदी–शाह शासन के अधिनायकवाद में लोकतंत्र को पुलिसिया दमन के जरिए कुचला जा रहा है।
जनता मार्च निकालेगी। यदि पुलिस इसे रोकती है, तो लोग शांतिपूर्वक जनता की संसद आयोजित करेंगे और व्यापक चुनाव सुधारों की मांग उठाएंगे। इसमें आनुपातिक प्रतिनिधित्व लागू करने, धनबल और बाहुबल पर अंकुश लगाने तथा चुनावों के लिए राज्य द्वारा वित्तपोषण को कानूनी मान्यता देने की मांग शामिल होगी। लोग सभी नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प लेंगे और अंत में राष्ट्रगान गाएंगे। हम सामूहिक रूप से यह घोषणा करेंगे कि हमारा संघर्ष तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक हम अपना लोकतंत्र वापस हासिल नहीं कर लेते।
शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हमले और महिलाओं के यौन उत्पीड़न के लिए दिल्ली पुलिस को चेतावनी शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है और राष्ट्रीय ध्वज फहराना कोई अपराध नहीं है। मोदी सरकार द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने को अपराध की तरह पेश करना और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचलना अक्षम्य है। दिल्ली पुलिस द्वारा महिला प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों का यौन उत्पीड़न शर्मनाक और स्तब्धकारी है। भारत का कोई भी कानून पुलिस को यह अधिकार नहीं देता कि वह नागरिकों के निजी घरों में घुसकर उन्हें उनके ही घरों में नजरबंद घोषित कर दे। इसके बावजूद, सर्वोच्च न्यायालय सहित न्यायपालिका द्वारा कानून के इस खुले उल्लंघन पर चुप्पी साधे रखना गंभीर चिंता का विषय है। मोदी–शाह शासन के तहत थोपी जा रही इस अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति को जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।
लोकतंत्र की पुनर्बहाली के लिए जनता का मार्च कहीं भी पुलिस की अनुमति नहीं मांगेगा। जनता पुलिस, अर्धसैनिक बलों और जेल प्रशासन को सख्त चेतावनी देती है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ राज्य की दमनकारी ताकत का इस्तेमाल न किया जाए।
जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का आदेश वापस लो! जनता का मार्च राष्ट्रीय राजधानी में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के स्थल के रूप में जंतर-मंतर को सूची से हटाने के मोदी सरकार के आदेश को वापस लेने की पुरजोर मांग करेगा। प्रदर्शन स्थलों को जनता वापस लेकर रहेगी।
– मीडिया प्रकोष्ठ: पीए–एसआईआर अखिल भारतीय समन्वय समिति

