माचागोरा किसान मजदूर पंचायत में किसानों का जनसैलाब उमड़ा

अगले एक माह में जिलाधीश विधायक ,सांसद और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपे जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट की कमेटी अविलंब डूब क्षेत्र के सभी गांव के दौरा करे।

किसान मजदूर पंचायतें अन्य जिलों में भी की जाएंगी

 

किसान संघर्ष समिति द्वारा माचागोरा, छिंदवाड़ा में किसान मजदूर पंचायत संपन्न हुई। किसान संघर्ष समिति द्वारा किसान मजदूर पंचायत में देश एवं प्रदेश के विभिन्न जिलों से आये किसान मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया । स्वागत भाषण प्रकाश साहू ने दिया। किसान मजदूर पंचायत का संचालन जिला अध्यक्ष बलराम पटेल ने किया।
किसान मजदूर पंचायत में विभिन्न मांगों का प्रस्ताव का वाचन घनश्याम साहू ने किया। जिस पर उपस्थित अतिथियों एवं किसानों, मजदूरों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया। ज्ञापन पत्र पर हजारों किसानों ने मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक और जिलाधीश को सौंपने हेतु हस्ताक्षर किये।

 

किसान मजदूर पंचायत को संबोधित करते हुए गुजरात से आए आदिवासी एकता परिषद के सचिव अशोक चौधरी ने कहा कि हम लोग जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा करेंगे तब जाके हमारी किसानी टिक पाएगी। यह काम भी हम लोगों को करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि युवा हताश और निराश हो रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि हमारा कोई भविष्य नहीं।
उन्होंने कहा कि अकेले-अकेले करने के बावजूद हम लोग स्वरोजगार हेतु सहकारी मंडलियां कैसे स्थापित करे इस पर विचार करना होगा।

किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सुनीलम ने युद्ध के परिणामों पर बोलते हुए कहा कि यदि युद्ध आगे चला तो किसानों को डीजल और खाद के संकट का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। सरकारों पर किसानों के साथ भेदभाव और अनदेखी का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकारें और पार्टियों के नेता किसानों को अन्नदाता कहते हैं वहीं दूसरी तरफ किसानों को उजाड़ने की नीति को विकास कहा जाता है। डॉ सुनीलम ने कहा कि किसान, किसानी और गांव को खत्म करने के लिए बीज विधेयक, बिजली संशोधन विधेयक और मनरेगा खत्म करने के कानून लाए गए हैं ताकि कंपनियों को सस्ते मजदूर उपलब्ध कराए जा सके, जिनके कोई अधिकार न हो। इसके खिलाफ किसानों, मजदूरों को संघर्ष करना होगा।

महाराष्ट्र के अकोला से आए शेतकरी विकास मंच के अध्यक्ष हुसैन खान ने कहा कि सरकार पहले किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती थी, लेकिन अब कृषि मंत्री आठ गुना बढ़ाने का दावा किया जा रहा है। हकीकत यह है कि किसानों की आय नहीं, बल्कि उनकी लागत आठ गुना बढ़ गई है, जिसे शायद नफा समझ लिया गया है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा, जिसकी वजह से किसान खेती छोड़ने पर मजबूर हो रहा है।
अगर हम समस्याओं की बात करें तो ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोड शेडिंग एक बड़ी समस्या है। किसान रात में खेतों की सिंचाई करने जाता है। जंगली जानवरों के हमलों का खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि किसान चारों तरफ से संकट में घिरा हुआ है और पूरा कृषि क्षेत्र संकट का सामना कर रहा है।

बीड़ महाराष्ट्र से आई किसान संघर्ष समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुशीला ताई मोराळे ने कहा कि कहा कि देश में पहले जहां सीमित बड़े उद्योगपति थे, वहीं अब गौतम अडानी, मुकेश अंबानी सहित अन्य बड़े कॉरपोरेट समूह तेजी से बढ़ रहे हैं, जिनके कारण किसानों के हित प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत हालिया बजट किसानों के हित में नहीं है। बजट में किसानों के लिए कोई ठोस और लाभकारी निर्णय शामिल नहीं किया गया है, जिससे कृषि क्षेत्र लगातार संकट में है।
किसानों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर भी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से किसान आर्थिक तंगी और कर्ज के कारण आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं, देश में प्रतिदिन 31 किसान आत्महत्या कर रहे हैं लेकिन सरकार इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दे रही है।
माचागोरा डैम परियोजना से प्रभावित 35 गांवों के किसानों की स्थिति पर भी चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जमीन अधिग्रहण के कारण कई परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है, जिससे सामाजिक समस्याएं भी उत्पन्न हो रही हैं।
इसके अलावा बेरोजगारी के मुद्दे को उठाते हुए बताया गया कि मध्य प्रदेश में हाल ही में निकली सीमित सरकारी नौकरियों के लिए लाखों युवाओं ने आवेदन किया, जिनमें बड़ी संख्या में उच्च शिक्षित अभ्यर्थी भी शामिल थे। अ भा कि सभा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष प्रहलाद दास बैरागी ने कहा कि भाजपा सरकार देशहित के खिलाफ नीतियाँ लागू कर रही है। वर्ष 2014 से सत्ता में आने के बाद सरकार का असली चेहरा अब सामने आ रहा है। हाल ही में हुई भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता (FTA) देश के हितों के विरुद्ध है, जिसमें देश की अर्थव्यवस्था और किसानों के भविष्य को दांव पर लगाया जा रहा है।
सरकार एक तरफ किसानों की सुरक्षा की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर ऐसी नीतियाँ बना रही है जो किसानों के लिए विनाशकारी हैं। यदि सोयाबीन डीओसी, पाम ऑयल और कपास जैसे उत्पाद अमेरिका से आयात किए जाएंगे, तो देश के किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य कैसे मिलेगा?

प्रदेश अध्यक्ष एड आराधना भार्गव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार कहती है कि जमीन के बदले जमीन दे दी,
कमांड एरिया का मुआवजा दे दिया, मकान बनाने का पैसा दे दिया, रजिस्ट्री का पैसा दे दिया, माचागोरा बांध मछुआरों की सोसाइटी को दे दिया। लेकिन सवाल ये है क्या ये सब वास्तव में नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ हम सुप्रीम कोर्ट गए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने एक 7 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाई। लेकिन अभी तक कमेटी ने जांच शुरू नहीं की है। कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री अडानी को बचाने के लिए पूरे देश को गिरवी रखने जा रहे हैं। हमें किसान, किसानी और गांव को बचाने के लिए हर गांव, हर जिले में संघर्ष करना होगा। उन्होंने कहा कि रीवा में जेपी सीमेंट कंपनी के खिलाफ किसान संघर्ष समिति ने लम्बी लड़ाई लड़ी है। हजारों एफ आई आर हुई, जेल गए, जिला बदर हुआ, लड़ाई किसान संघर्ष समिति जो लड़ती है । आज स्थिति यह है कि हिंदुस्तान में जेपी का नामोनिशान नहीं बचा है।
उत्तर प्रदेश से आए सुधीर क्रांतिकारी ने कहा कि पिछले लगातार छह वर्षों से हम छात्र अपने मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। चाहे वह फीस वृद्धि का मुद्दा हो, हॉस्टल की समस्याएं हों, या शिक्षा से जुड़े अन्य सवाल—इन सभी पर हम लगातार आवाज उठा रहे हैं। लेकिन हमारा संघर्ष सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं है। हम देश के हर उस आंदोलन में शामिल होते हैं जहां आदिवासियों के अधिकारों की बात हो, किसानों के मुद्दे उठ रहे हों या शोषित, पीड़ित और वंचित वर्ग के हक की लड़ाई हो। हम हर जगह सक्रिय रूप से अपनी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि माचागोरा आने के बाद हम आसपास के गांवों में गए, जहाँ हमने लोगों से बातचीत की और उनकी मुख्य समस्याओं को करीब से समझा।
प्रदेश सचिव डॉ राजकुमार सनोडिया ने कहा कि किसान बिजली विभाग को करोड़ो रुपए मेंटेनेंस के नाम पर देते हैं लेकिन विभाग मेंटेनेंस नहीं करती, उसके कारण आगजनी से किसानों की फसलें जलकर खाक हो जाती है। उन्होंने सरकार से किसानों को जली हुई फसल का लागत से डेढ़ गुना मुआवजा देने की मांग की। प्रदेश सचिव शत्रुघन यादव ने कहा कि वर्तमान सरकारें आम जनता के बजाय पूंजीपतियों के हित में कानून बना रही हैं। उन्होंने कहा कि आज जिस विकास की बात की जा रही है, उसकी अवधारणा ही गलत है। वह विकास, जो देश को विनाश की ओर ले जा रहा है, उसे हम विकास मान बैठे हैं।

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