राजनीति में जमीनी संघर्ष करने वालों के लिए बन रहा बड़ा स्पेस!

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय ने जबरदस्त सफलता हासिल कर दिया बड़ा संदेश

चरण सिंह 
देश में राजनीति का स्तर कितना भी गिर गया हो। कितनी भी एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा हो।  तमिलनाडु में अपनी पार्टी बनाकर इतिहास बनाने वाले थलपति विजय ने दिखा दिया कि देश की राजनीति में जमीनी संघर्ष करने वाले नेतृत्व के लिए स्पेस बन रहा है। ऐसा नहीं है कि बीजेपी कोई कीर्तिमान स्थापित कर रही हो ? मीडिया के सत्ता के लिए काम करने और विपक्ष में स्थापित दलों में संघर्ष के अभाव का फायदा बीजेपी उठा रही है। विपक्ष तमिलनाडु और प. बंगाल में हार का रोना रो रहा है। इस पर बात पर मंथन करने को तैयार नहीं कि आखिरकार विपक्ष ऐसा कर क्या रहा है कि जिससे लोग उसे वोट दें।
दरअसल विपक्ष में स्थापित अधिकतर पार्टियों के एक नेतृत्व एक परिवार तक सिमटा है। जो कार्यकर्ता इन परिवारों से जितना तालमेल बना लेंगे उतने ही अच्छे संबंध पार्टी नेतृत्व से रहेंगे। अब लोग वंशवाद और परिवारवाद नेतृत्व के बजाय नए सघर्षशील नेतृत्व को पसंद कर हैं। थलपति विजय के सामने ही एक से बड़ी कठिनाई आई पर वह डिगे नहीं और अब मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।
निश्चित रूप से बीजेपी से बड़े स्तर पर लोग नाराज हैं पर विपक्ष में स्थापित दल ऐसा कोई संदेश नहीं दे पा रहे हैं कि जनता की सहानुभूति उन्हें मिले। क्या विपक्ष का कोई दल जनहित के मुद्दों पर सड़कों पर संघर्ष करने को  तैयार है ? क्या कोई नेता आंदोलन कर जेल जाने को  तैयार है ? क्या किसी दल ने केंद्र सरकार के खिलाफ कोई बड़ा आंदोलन किया है ? क्या जनहित के किसी मुद्दे पर विपक्ष के सभी दलों ने सड़क पर कोई एकजुटता दिखाई है ? क्या विपक्ष की कोई संयुक्त रैली हुई है ?
इन्हीं ममता बनर्जी ने इंडिया गठबंधन के अध्यक्ष के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे नाम प्रस्तावित कर नीतीश कुमार को बिदका दिया था। जब इंडिया गठबंधन की रुपरेखा नीतीश कुमार ने टी तैयार की। उन्होंने ने ही सभी दलों को एकजुट किया तो अध्यक्ष बनना तो उनका ही बनता था ममता बनर्जी और अरविन्द केजरीवाल ने खेल बिगाड़ दिया। रही सही कसर लालू प्रसाद ने निकाल दी। जब नीतीश कुमार भरी मीटिंग से उठकर पटना चले गए तो लालू प्रसाद ने उन्हें रोका नहीं। न ही बाद में उनको मनाने का कोई खास प्रयास किया गया। यदि नीतीश कुमार की अगुआई में 2024 का लोकसभा चुनाव इंडिया गठबंधन लड़ता तो आज सीज कुछ और ही होता। नीतीश कुमार के एनडीए में जाते ही पासा पलट गया था।
दरअसल थालपति विजय का नाम राजनीति में जबरदस्त रूप से उभरा है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव परिणाम में विजय की पार्टी टीवीके ने 234 सदस्यीय विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर जबरदस्त सफलता हासिल की है। वह तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। डीएमके, एडीएमके और कांग्रेस के सामने लोगों ने नई नवेली पार्टी को ज्यादा पसंद किया। किसी समय अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को भी लोगों ने ऐसे ही पसंद किया था। संदेश साफ़ है कि यदि कोई न्य नेतृत्व जमीनी संघर्ष करे तो बहुत जल्द सफलता पा सकता है। जमीनी संघर्ष के अभाव में ही विपक्ष के दल सिमटते जा रहे हैं।
विजय का पूरा नाम जोसेफ विजय चंद्रशेखर है। उनका जन्म 22 जून 1974 को तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) में हुआ था। उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर तमिल फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने निर्देशक हैं, जबकि उनकी मां शोभा चंद्रशेखर एक प्रसिद्ध गायिका हैं। विजय ने अपनी शुरुआती पढ़ाई चेन्नई के स्कूलों से की और बाद में लोयोला कॉलेज में विजुअल कम्युनिकेशन की पढ़ाई शुरू की, लेकिन अभिनय के प्रति जुनून के चलते उन्होंने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी।

विजय ने तीन दशक से अधिक लंबे करियर में 60 से ज्यादा फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई है और वे तमिल सिनेमा के सबसे सफल और सबसे अधिक कमाई करने वाले अभिनेताओं में गिने जाते हैं। उनकी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर कई रिकॉर्ड बनाए और उन्हें एक बड़े जनाधार वाला सुपरस्टार बना दिया।

राजनीति में एंट्री

विजय ने राजनीति में कदम रखने की तैयारी काफी पहले शुरू कर दी थी। साल 2009 में उन्होंने अपने फैन क्लब को संगठित कर विजय मक्कल इयक्कम बनाया, जो धीरे-धीरे सामाजिक कार्यों और जनसेवा के जरिए जमीनी स्तर पर मजबूत होता गया। 2022 के स्थानीय निकाय चुनावों में उनके समर्थकों ने 100 से अधिक सीटें जीतकर अपनी ताकत का एहसास कराया। इसके बाद 2 फरवरी 2024 को विजय ने अपनी राजनीतिक पार्टी तमिलगा वेट्री कषगम के गठन की घोषणा की।

विचारधारा और राजनीतिक रुख

विजय ने खुद को सत्तारूढ़ डीएमके के विकल्प के रूप में पेश किया है, जिसे वे “राजनीतिक दुश्मन” और “बुरी ताकत” बताते हैं। वहीं, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को “विचारधारात्मक विरोधी” करार दिया है और स्पष्ट किया है कि वे किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। उनका चुनावी नारा “व्हिसल रिवोल्यूशन” (सीटी क्रांति) है, जिसके जरिए वे बदलाव का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने चुनाव में महिलाओं को हर महीने ₹2500 देने, साल में 6 मुफ्त गैस सिलेंडर और मुफ्त बिजली जैसी बड़ी घोषणाएं की हैं।
राजनीतिक सफर में विजय को चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। 2025 में करूर में उनकी रैली के दौरान भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी, जिसकी जांच सीबीआई कर रही है। इसके बावजूद उन्होंने अपनी राजनीतिक मुहिम को जारी रखा। वहीं विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी वे कई तरह से विरोधियो के निशाने पर रहे।
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