महाराष्ट्र में कम बारिश के कारण उत्पन्न सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। संकट की स्थिति पर तत्काल और स्थायी उपाय सुझाने के लिए राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 12 सदस्यीय उच्चस्तरीय अध्ययन समूह का गठन किया गया है। पशुपालन, डेयरी विकास एवं मत्स्य विभाग ने इस संबंध में 6 अक्टूबर को शासनादेश जारी किया। राज्य में इस वर्ष बारिश के रूठ जाने के कारण सूखे जैसी स्थिति पैदा हो गई है। राज्य सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए कर्जमाफी और पंचनामा करने पर जोर दिया है. साथ ही अब राज्य में 10 प्रतिशत पानी की कटौती भी की जाएगी।
समीक्षा के लिए गठित की गई मंत्रिमंडल की उपसमिति
राज्य में संकट की स्थिति की समीक्षा के लिए राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की उपसमिति का गठन किया गया था। इस उपसमिति की 29 सितंबर को बैठक हुई। बैठक में सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए अल्पकालीन और दीर्घकालीन उपाय सुझाने हेतु उच्चस्तरीय प्रशासनिक अध्ययन समूह गठित करने का निर्णय लिया गया था. इसके अनुसार अब इस अध्ययन समूह को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है।
12 वरिष्ठ अधिकारियों का समावेश
इस अध्ययन समूह के अध्यक्ष राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव होंगे वित्त, नियोजन, ऊर्जा और वन विभागों के अपर मुख्य सचिव, राहत एवं पुनर्वास, सहकारिता, मृदा एवं जल संरक्षण तथा जल संसाधन विभागों के प्रधान सचिव और कृषि तथा ग्राम विकास विभाग के सचिव इस समूह के सदस्य होंगे. पशुपालन, डेयरी विकास एवं मत्स्य विभाग के सचिव सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे।
चारे की कमी पर विशेष ध्यान
अध्ययन समूह द्वारा राज्य में इससे पहले लागू किए गए सूखा राहत उपायों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही अन्य राज्यों में सूखे से निपटने के लिए लागू की गई सफल योजनाओं का भी अध्ययन किया जाएगा।
इसके अलावा राज्य में उपलब्ध चारे, उसके संभावित उत्पादन और आगामी अवधि में चारे की आवश्यकता का अनुमान लगाकर पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था की योजना तैयार करने की जिम्मेदारी भी अध्ययन समूह की होगी। इसके अलावा संकट जैसी स्थिति से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन कर सरकार को ठोस उपायों की सिफारिश करने का काम भी यह समूह करेगा।






