मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हमने किसी बदलाव की मंजूरी नहीं दी है. इसी के बाद नए सिरे से सियासी बवाल खड़ा हो गया है। कांग्रेस से लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने तीखी प्रतिक्रिया दी और सीईसी पर झूठ बोलने के आरोप लगाए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि साफ और स्पष्ट है कि सीईसी ने झूठ बोला। सीईसी ने खुद जानबूझकर फॉर्म 6 में बदलाव किया ताकि जेन Z वोटरों के नाम हटाए जा सकें, जिनसे प्रधानमंत्री बुरी तरह डरे हुए हैं।
वहीं सीजेपी के संयोजक अभिजीत दीपके ने सीजेआई के बयान को कोट करते हुए कहा, ”इतना ही काफी नहीं है! जो भी चीज कानून के मुताबिक नहीं पाई जाती, उसे गैर-कानूनी कहा जाता है, और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति पर उसी के अनुसार आरोप लगाया जाना चाहिए.” उन्होंने पूछा, ”ज्ञानू, तुमने ऐसा क्यों किया?”
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दाखिल करने वाले शैलेंद्र मणि त्रिपाठी के वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि नए वोटर को जोड़ने वाले ‘फॉर्म 6’ में बदलाव किया गया है. इसपर सीजेआई ने नोटिस जारी किया. चीफ जस्टिस ने कहा, “फॉर्म 6 में बदलाव को कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है. रिकॉर्ड सामने आने पर देखा जाएगा कि यह बदलाव किसने किया?”
सीजेपी के संस्थापक सदस्य सौरव दास ने कहा कि आज भारत के सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को झूठा करार देते हुए उन्हें बुरी तरह फंसा दिया है. ज्ञानू (ज्ञानेश कुमार), अब तुम्हारा खेल खत्म है भाई।
सौरव दास ने बताया क्या है पूरा मामला?
उन्होंने कहा, ”यह बहुत बड़ी बात है! आज सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार की एक गैर-कानूनी हरकत से खुद को अलग कर लिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि कोर्ट ने फॉर्म 6 (नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन के लिए फॉर्म) में किसी भी बदलाव को मंज़ूरी नहीं दी थी.”
दास ने कहा, ”याद रखें कि बाकी दो चुनाव आयुक्तों ने फॉर्म में किए गए बदलाव पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इससे नए वोटरों, खासकर ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) को परेशानी हो रही थी और उन्हें वोटर के तौर पर रजिस्टर होने से रोका जा रहा था। कानून और चुनाव नियमों में बदलाव के बाद ही फॉर्म में बदलाव किया जा सकता था।
उन्होंने कहा, ”और भी चिंता की बात यह है कि ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में ज्ञानेश कुमार (ज्ञानू) के मामले का खुलासा होने के ठीक एक दिन बाद, 26 सितंबर को चुनाव आयोग की प्रेस रिलीज़ में कहा गया था कि “SIR के लिए फॉर्म 6 के साथ लगे डिक्लेरेशन को SC ने सही ठहराया है”, लेकिन आज, CJI सूर्य कांत ने इससे इनकार कर दिया है!”
सौरव दास ने कहा, ”जिस कोर्ट ने ज्ञानू की SIR प्रक्रिया को कानूनी मान्यता दी थी, उसने अब हाथ खड़े कर दिए हैं और कहा है कि ज्ञानू की गैर-कानूनी कार्रवाई से उनका कोई लेना-देना नहीं है!”
आशुतोष रांका ने क्या कहा?
वहीं आशुतोष रांका ने कहा, ”यह बहुत बड़ी बात है. CJI ने अभी कहा है कि बदले हुए ‘फॉर्म 6’ को SC ने मंजूरी नहीं दी थी। यह 26 सितंबर को ECI की प्रेस रिलीज़ के बिल्कुल उलट है, जिसमें कहा गया था कि ‘फॉर्म 6’ के डिक्लेरेशन को SC ने सही ठहराया था.”
उन्होंने कहा, ”याद रखें, ‘फॉर्म 6’ का इस्तेमाल नए वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए होता है, जिसमें ज्ञानेश ने अपनी मर्ज़ी से एक डिक्लेरेशन जोड़ दिया था और मजे की बात यह है कि 26 सितंबर की प्रेस रिलीज़ अब ECI की वेबसाइट पर मौजूद नहीं है. क्या CEC ने देश की जनता से आधिकारिक तौर पर झूठ बोला है?
क्या है फॉर्म 6?
बता दें कि फॉर्म 6 का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में नया नाम जोड़ने के लिए किया जाता है। विपक्षी दलों का दावा है कि SIR के दौरान इस फॉर्म में बदलाव किया गया. बदलाव में नए वोटर्स को अपने या अपने माता-पिता और दादा-दादी के पुराने एसआईआर रिकॉर्ड से संबंध बताना है। चुनाव आयोग ने इसपर सफाई दी थी और कहा था कि फॉर्म 6 में किसी तरीके का बदलाव न करते हुए उसके साथ में एक डिक्लेरेशन फॉर्म जोड़ा गया है।
फॉर्म 6 के साथ डिक्लेरेशन फॉर्म का इस्तेमाल सिर्फ SIR प्रक्रिया तक ही सीमित है, और SIR प्रक्रिया खत्म होने के बाद फार्म 6 पहले की तरह ही भरा जा सकेगा और नए मतदाता उसी तरह से अपना नाम जुड़वा सकेंगे।





