नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 की मतगणना के 15वें राउंड के बाद छात्र राजनीति की एक असाधारण तस्वीर सामने आई है। इस बार के नतीजों में सबसे बड़ा उलटफेर उपाध्यक्ष पद पर देखने को मिला है, जहां किसी प्रमुख पार्टी का समर्थन न होने के बावजूद निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने भारी बढ़त बनाए हुए हैं।
पहले NSUI से चुनाव लड़ रहे थे लेकिन…
दीपांशु शौकीन इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि वो कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI से उपाध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ रहे थे। उनका नामांकन भी हुआ था। लेकिन एनटाइम पर उनकी सीट किसी कांग्रेस नेता के बेटे को दे दी गई और संगठन ने नामांकन वापस लेने को कहा। लेकिन उन्होंने नाम वापस लेने से इनकार कर दिया और निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की।
कौन हैं दीपांशु शौकीन
दीपांशु शौकीन के पिता एक बस कंडक्टर और मां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। दीपांशु शौकीन वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय के बुद्धिस्ट स्टडीज विभाग के छात्र हैं और उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई शहीद भगत सिंह कॉलेज से पूरी की है। छात्र हितों और सामाजिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता तब से और तेज हो गई थी, जब सत्य निकेतन हादसे के बाद उन्होंने छात्रों को न्याय मिलने तक नंगे पैर रहने का संकल्प लिया था।
आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई ASAP मिला ऑफर
प्रचार के दौरान उन्हें आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई ASAP में शामिल होने का प्रस्ताव भी मिला और जाट बहुल पृष्ठभूमि के कारण ABVP उम्मीदवार यश डबास के साथ किसी अंदरूनी सियासी तालमेल की अटकलें भी लगीं, लेकिन दीपांशु ने सभी चर्चाओं को खारिज करते हुए स्वतंत्र रूप से मैदान में डटे रहने का विकल्प चुना। परिवार चाहता था कि वे यूपीएससी (UPSC) की तैयारी करें, लेकिन उन्होंने सिविल सेवा के बजाय राजनीति के जरिए जमीनी स्तर पर काम करने का रास्ता चुना।





