बहन का नाम वोटर लिस्ट काटने पर भड़के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल
नई दिल्ली: सीनियर एडवोकेट और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे। ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) की आलोचना की है। कपिल सिब्बल ने शनिवार को कहा कि उनकी बहन का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था। सिब्बल ने आगे कहा कि इसी तरह, जजों और विदेशी राजनयिकों के नाम भी हटाए गए लोगों की लिस्ट में पाए गए हैं।
कपिल सिब्बल बोले-कम लोग दोबारा जुड़वा रहे नाम
केरल के कोच्चि में ‘ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन’ की ओर से शनिवार को आयोजित ‘हॉर्स-ट्रेडिंग और लोकतंत्र’ पर कार्यक्रम में कांग्रेस नेता और एडवोकेट कपिल सिब्बल सवालों के जवाब दे रहे थे। उन्होंने बताया कि बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं, लेकिन बहुत कम लोगों ने ही अपना नाम दोबारा जुड़वाने के लिए फॉर्म भरा है, क्योंकि उन्हें डर है कि उन्हें परेशान किया जाएगा। बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं, लेकिन बहुत कम लोगों ने ही अपना नाम दोबारा जुड़वाने के लिए फॉर्म भरा है, क्योंकि उन्हें डर है कि उन्हें परेशान किया जाएगा।
कपिल सिब्बल ने समझाया SIR का मतलब
कपिल सिब्बल से एक सदस्य ने पूछा कि क्या ‘दल-बदल मुक्त भारत’ की लड़ाई को राजनीतिक समानता की बड़ी लड़ाई के हिस्से के तौर पर देखना व्यावहारिक है? यह लड़ाई SIR प्रोसेस के खिलाफ भी है। जिसने उनके मुताबिक निष्पक्ष चुनाव के कॉन्सेप्ट को ही खत्म कर दिया है।
इस पर सिब्बल ने जवाब दिया-‘सबसे पहले SIR का मतलब क्या है? सर (Sir) किसे कहा जाता है? भारत के प्रधानमंत्री को। SIR का मतलब यही है। सर, आप जो कहेंगे हम वही करेंगे।’ सिब्बल ने कहा-हमें जमीनी हकीकत पता है। हमें पता है कि बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं। यह पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के अपने तौर-तरीकों के खिलाफ है। 1950 के बाद से कभी किसी को फॉर्म भरने की जरूरत नहीं पड़ी थी। अब एक स्कूल टीचर, जो BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) होता है, वोटर लिस्ट में किसी के नाम के आगे ‘D’ यानी ‘डाउटफुल’ (संदिग्ध) लिख देता है, और वह वोटर वोट नहीं डाल पाता।’
सबसे पहले SIR का मतलब क्या है? ‘सर’ (Sir) किसे कहा जाता है? भारत के प्रधानमंत्री को। SIR का मतलब यही है। ‘सर, आप जो कहेंगे हम वही करेंगे’। हमें जमीनी हकीकत पता है। हमें पता है कि बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं। यह पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के अपने तौर-तरीकों के खिलाफ है।
कपिल सिब्बल बोले-फॉर्म भरने की हिम्मत नहीं जुटा पाते
कपिल सिब्बल ने आगे कहा कि BLO का किसी को ‘संदिग्ध वोटर’ (doubtful voter) बताना न तो किसी आधार पर होता है और न ही वोटर को यह बताया जाता है कि उसे संदिग्ध वोटर क्यों माना गया है।
उन्होंने कहा-‘विदेश सेवा में काम करने वाले लोग भी संदिग्ध वोटर की श्रेणी में हैं, ऐसे जज हैं जिनके नाम लिस्ट में नहीं हैं, आम लोग हैं, सेना के जवान हैं और मेरी अपनी बहन का नाम भी लिस्ट में नहीं है। ऐसे बहुत से लोग हैं जिनके नाम लिस्ट में नहीं हैं। अब उन्हें फॉर्म भरना होगा। भारत में जिस तरह की सामाजिक असमानता है, लोग फॉर्म भरने की हिम्मत नहीं जुटा पाते क्योंकि उन्हें डर होता है कि उन्हें परेशान किया जाएगा।’
सिब्बल ने कहा-‘कई मामलों में, खास समुदायों के लोगों के नाम बड़े पैमाने पर हटा दिए जाते हैं, तो ऐसे में वे कहां जाएं? इस समस्या को सुलझाने के लिए कोई तेज प्रक्रिया नहीं है। हर कोई सुप्रीम कोर्ट आकर यह नहीं कह सकता कि हमारे मामले का फैसला करें, उनके पास इसके लिए जरूरी साधन नहीं हैं। पूरी प्रक्रिया ही दूषित है।’
कई मामलों में, खास समुदायों के लोगों के नाम बड़े पैमाने पर हटा दिए जाते हैं, तो ऐसे में वे कहां जाएं? इस समस्या को सुलझाने के लिए कोई तेज प्रक्रिया नहीं है। हर कोई सुप्रीम कोर्ट आकर यह नहीं कह सकता कि हमारे मामले का फैसला करें, उनके पास इसके लिए जरूरी साधन नहीं हैं। पूरी प्रक्रिया ही दूषित है। ECI की SIR कराने की शक्ति की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए कई याचिकाएं दायर की गई थीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस साल मई में इस प्रक्रिया को संवैधानिक करार दिया।






