समाज और देश को पानीदार बनाने की जरूरत
विकास की दिशा नहीं बदलेगी
तब तक पार्टियों और सरकारों के बदलने से नतीजे नहीं निकलेंगे
युसूफ मेहेरअली सेंटर द्वारा ग्राम तारा, पनवेल (मुम्बई) में 2 से 4 अक्टूबर तक ‘फेस्टिवल ऑफ अल्टरनेटिव्स’ आयोजित किया जा रहा है। 4 अक्टूबर को जल, जंगल, जमीन पर केंद्रित सत्र होना है, जिसमें जल पुरुष राजेंद्रसिंह जी आमंत्रित किए गए हैं। इसी कार्यक्रम के संदर्भ में बातचीत करने के लिए मैंने राजेंद्रसिंह जी को फोन किया, उन्होंने कहा कि पहले 13 सितंबर को दिल्ली आ जाओ, वही बात हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम भी अल्टरनेटिव्स पर ही है। आप अवश्य आइए, मैं हरिजन सेवक संघ पहुंच गया। वहां पर जैविक खेती से लेकर डाटा सेंटर तक कई मुद्दों पर गहन चर्चा सुनने को मिलीं। ज्यादातर प्रतिभागियों ने उनके द्वारा या राजेंद्रसिंह जी के द्वारा नदियों को बचाने का जो काम किया जा रहा है उसके अनुभव साझा किए, चंबल में दस्युओं ने कैसे बंदूक छोड़कर परिवार की महिलाओं के कहने पर खेती को अपनाकर अपना जीवन सुधरा यह बात भी बार बार सुनने मिली।
पानी पर ही एक किताब का लोकार्पण कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसी कार्यक्रम में दो घंटे के लिए मध्य प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल भी शामिल हुए। उन्होंने नर्मदा नदी से लेकर मध्य प्रदेश की तमाम नदियों के उद्गम स्थलों पर अपने द्वारा किए गए कार्यों का उल्लेख किया। वृक्षारोपण और उसके साथ जुड़ी हुई जवाबदेही की भी चर्चा की।

मैंने अपने वक्तव्य में प्रहलाद पटेल के समक्ष मध्यप्रदेश के 6 न्यूक्लियर पावर प्लांट से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान का उल्लेख किया तथा मंत्री महोदय से अनुरोध किया कि वे सभी प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के स्थलों पर सरकार की ओर से जनसुनवाई आयोजित करवाएं। किसान संगठनों, प्रभावित किसानों और पर्यावरण पर काम करने वाले संगठनों को बुलाकर उनकी सुनवाई करें। मैंने छिंदवाड़ा की जनसुनवाई की जानकारी भी सांझा की । इसके साथ ही अनावरी मापने की इकाई किसान का खेत बनाने की आवश्यकता को लेकर अपने तर्क प्रस्तुत किए। उन्हें मुलताई गोली चालन की भी याद दिलाई। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण विकास के लिए केवल 6.1% बजट आवंटन किए जाने की आलोचना भी की।
मैंने कहा कि जब तक वर्तमान विकास की दिशा नहीं बदलती तब तक पार्टियों और सरकारों के बदलने से नतीजे नहीं निकलेंगे। मैंने यह भी जिक्र किया कि एक पेड़ मां के नाम लगाने की अपील करना और केवल मध्य प्रदेश में ही 10 वर्षों में 10 लाख पेड़ अडानी के हाथों कटवा देना पर्यावरण के खिलाफ सुनियोजित अपराध है।

खैर, जैसी उम्मीद थी मेरे मुद्दों पर मंत्री महोदय ने कोई टिप्पणी नहीं की लेकिन राजेंद्रसिंह जी ने तथा अन्य वक्ताओं ने संघर्ष के साथ-साथ संवाद और रचनात्मक कार्यों की आवश्यकता को लेकर वक्तव्य दिए। उन्होंने कहा कि अडानी से वे डरते नहीं हैं खुलकर उन्हें चुनौती देते रहे हैं।
राजेंद्र सिंह जी को सुनना सदा आनंददाई और ज्ञानवर्धक होता है। समाज को पानीदार बनाना, बरसाती पानी को धरती मां के पेट में पहुंचाना, नदियों और खेती को पुनर्जीवित करना, जवानी और किसानी को केंद्र में रखकर वे अपनी बात कहते हैं। उनके वक्तव्य में गांधीजी और विनोबा जी के विचारों की व्याख्या होती है। कार्यक्रम में जो सुनने- सुनाने मिला वह महत्वपूर्ण तो था ही कर्नाटक के पुराने मित्र पूर्व विधायक महिमा पटेल, झांसी के सामाजिक कार्यकर्ता संजय सिंह, बीड के अनिकेत लोहिया, ईश्वर भाई, रीवा के डॉ मुकेश, करनाल के मुस्लिम चौहान , गाजियाबाद के एडवोकेट विक्रांत सिंह से लंबे समय बाद मुलाकात काफी सार्थक रही। पुणे के नरेंद्र चुग के वक्तव्य ने मुझे सर्वाधिक प्रभावित किया।

कार्यक्रम में शामिल होने मेरे प्रिय साथी मानव अधिकार अधिवक्ता एडवोकेट मोहम्मद शकील विशेष तौर पर मुंबई से दिल्ली आए। न्यूज़ 15 के संपादक चरण सिंह भी कार्यक्रम में विशेष तौर पर उपस्थित रहे।






