हिन्दू-मुस्लिम के अलावा कुछ नहीं है बीजेपी के पास, हिन्दुओं के ध्रुवीकरण के लिए चली जा रही हर चाल
यूजीसी के नियमों में बदलाव कर सवर्णों को ओबीसी-एससी एसटी से लड़ाने की है योजना
सवर्णों की नाराजगी पर पिछड़ों और दलितों की सहानुभूति बटोरना चाहती है बीजेपी
बीजेपी राज में पूंजीपति, नेता और ब्यूरोक्रेट्स की चांदी, ठगा जा रहा किसान-श्रमिक और छोटा व्यापारी
चरण सिंह
सबसे अच्छा राज वह माना जाता है जिसमें हर वर्ग अपने को सुरक्षित समझे। कोई किसी से कोई खतरा महसूस न करे। यदि राज कर रहे लोग ही 80 प्रतिशत वाले तबके को 20 प्रतिशत वाले तबके से खतरा महसूस कराने लगेंगे तो समझा जा सकता है कि सत्ता में बैठे लोग डरपोक और नकारा हैं। यह भी कहा जा सकता है कि 80 प्रतिशत लोगों का वोट बटोरने के लिए 20 प्रतिशत लोगों को टारगेट बनाया जा रहा है।
जी हां मैं बात मौजूदा बीजेपी शासन की कर रहा हूं। बीजेपी की सत्ता में बैठे लोग कभी हिन्दुओं में मुस्लिमों के प्रति खतरा पैदा कर बंटेंगे तो कटेंगे का नारा देंगे। कभी मस्जिदों में शिवलिंग तलाशने लगेंगे। कभी मस्जिदें ध्वस्त कराने लगेंगे। मुस्लिम के नाम पर लोगों में नफरत पैदा करेंगे। कभी मुस्लिमों को टारगेट कर हिन्दुओं की सहानुभूति बटोरने की कोशिश करेंगे। बस किती तरह से सत्ता मिल जाए। निश्चित रूप से मुग़ल काल में बड़े स्तर पर हिन्दुओं का शोषण हुआ पर उन मुग़ल शासकों के सेनापति तो हिन्दू थे। ओरंगजेब का सेना कौन था ? राजा जय सिंह और राजा जसवंत सिंह।
अकबर का सेनापति कौन था ? राजा मानसिंह, राजा टोडरमल और भगवान दास । शाहजहां का सेनापति कौन था ?अमर सिंह ? ऐसे ही महाराणा प्रताप का सेनापति कौन था ? एक मुसलमान हकीम खां सूरी। महारानी लक्ष्मीबाई का तोपची कौन था ? एक मुसलमान गुलाम गौस खान। दरअसल वह वर्चस्व की लड़ाई थी। सब राजाओं की अपनी अपनी सेना थी। वह राजतंत्र था। क्योंकि राजतंत्र में जनता का शोषण था। इसलिए ही तो लोकतंत्र की लड़ाई लड़ी गई।
आज़ाद भारत में राजतंत्र से अधिक बात आज़ादी की लड़ाई की होनी चाहिए। यदि आज देश में बीजेपी का राज है तो इसलिए क्योंकि देश में लोकतंत्र है। लोकतंत्र देश के आज़ाद होने के बाद आया है। चर्चा इस बात की होनी चाहिए कि देश को आज़ाद करने के किन लोगों ने कितने कुर्बानी दी। क्या आज़ादी में देश के मुसलमानों का योगदान नहीं है ? यदि है तो फिर टारगेट क्यों ? जिस विचारधारा से बीजेपी आती है उसका का तो आज़ादी कोई कोई योगदान नहीं है। उल्टा ये लोग तो भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध कर रहे थे।
देश में हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में हैं भाई भाई के नारे से ही देश आगे बढ़ेगा।
यह भी जमीनी हकीकत है कि हिन्दुओं की हितैषी बनने वाले बीजेपी ने सबसे अधिक नुकसान हिन्दुओं का ही किया है। वह भी अपने वोटबैंक का। हर क्षेत्र में देख लीजिए, कोई सी भी परीक्षा उठाकर देख लीजिये। मुस्लिमों का रिकार्ड सुधरा है और हिंदुओं विशेषकर बीजेपी के वोटबैंक का बिगड़ा है। इसकी बड़ी वजह यह रही कि मुस्लिम युवा पढ़ने पर ध्यान दे रहे हैं और बीजेपी के वोटबैंक के अधिकतर युवा उन्मादी माहौल में खुश हैं। सियासतदार वोटबैंक के लिए युवाओं को भटका देते हैं और ये बेचारे इन झांसे में आ जाते हैं।
एक समय था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बड़ा तबका हिन्दुओं का मसीहा मानने लगा था। अब बताए वह तबका क्या मान रहा है ? जब यूजीसी के नियम में बदलाव कर सवर्णों को ओबीसी और एससी एसटी से लड़ाने का खेल मोदी ने किया तो उस तबके की समझ में आ गया। मोदी के प्रति गलतफहमी निकल गई है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति अभी भी है। यह भी यूपी चुनाव में निकल जाएगी। बीजेपी और उसके समर्थक फ्लाईओवर और हाइवे की बात करते-करते थकते नहीं है। इनसे कोई पूछे कि जब लोगों पर पैसा ही नहीं रहेगा तोहाइवे पर कैसे चलेंगे। रोजगार पर तो इन सरकारों का कोई ध्यान नहीं है। जितना बस से किराया नहीं लगता उससे अधिक तो गाड़ी से जाने पर टोल टैक्स लग जाता है। जो लोग बीजेपी के राज को अच्छा राज मानते हैं। वे अपने घरों में रोजगार और आय का प्रतिशत देख लें।
बीजेपी के राज में पूंजीपति, नेता, ब्यूरोक्रेट्स मालामाल हुए हैं। आम आदमी तो आज भी दो वक्त की रोटी के लिए जूझ रहा है। यदि ऐसा नहीं है तो फिर सरकार को 80 करोड़ लोगों को फ्री में राशन क्यों देना पड़ रहा है ? इस सरकार में एक सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि जो व्यक्ति इस सरकार के खिलाफ आवाज उठाए वह नक्सली, आतंकवादी, देशद्रोही न जाने क्या क्या हो जाता है। अब तो प्रधानमंत्री ने दिमागी नक्सली और नाराज फूफा का नाम भी दे दिया। मतलब सरकार के खिलाफ आवाज नहीं उठाने देनी है। साहसी व्यत्कि किसी को डराता नहीं है। क्योंकि उसे अपने पर विश्वास होता है जब चाहेगा निपट लेगा। कमजोर और कायर आदमी दूसरे को भय दिखाता है। उसे पता है कि भय नहीं होगा तो उससे निपटना उसके बात नहीं है। ऐसा ही बीजेपी वालों के साथ है।
बीजेपी का रिकार्ड रहा है कि जब भी सत्ता मिली। पूंजीपतियों के लिए काम किया। नौकरी पेशा, किसान को तो परेशान ही किया। वाजपेयी सरकार पेंशन खत्म कर गई थी अब मोदी सरकार ने तो रोजगार ही ख़त्म कर दिया। शिक्षा चिकित्सा का कबाड़ा। क्या आज की तारीख में कोई आम आदमी अपने बच्चों को इन प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा सकता है ? क्या कोई आम आदमी इन प्राइवेट अस्पतालों में अपना और अपने बच्चों का इलाज करा सकता है ? जरा कल्पना करो। जब सरकारी स्कूल और अस्पताल नहीं रहेंगे तो क्या होगा ? यदि ऐसे ही चलता रहा तो ज्यादा समय नहीं है जब सरकारी स्कूल और सरकारी अस्पताल ढूंढने से भी न मिले।
दिल्ली जंतर मंतर पर जब युवाओं ने नीट परीक्षा के पर्चे लीक होने के खिलाफ आंदोलन किया तो एक तबका इसका विरोध करने लगा। यह वही तबका था जिसके बच्चों के लिए यह आंदोलन हो रहा था ? नीट परीक्षा कौन छात्र देता है ? कौन छात्र थे जिन्होंने पर्चा लीक होने पर सुसाइड किया है ? कुछ लोग इसे भी दलितों और मुस्लिमों के आंदोलन से जोड़कर देखने लगे। ये वे लोग हैं जिन्हें बीजेपी ने अंधभक्त और विवेकहीन बना दिया है।
सीजेपी ने सरकारी स्कूलों को सुधारने का जो अभियान छेड़ा है उसमें किसका फायदा होगा ? आम आदमी का न ?अच्छे प्राइवेट स्कूल में बच्चे का दाखिला कराते ही 10000 रुपए प्रतिमाह फीस चाहिए। हर व्यक्ति के लिए एक दो तीन भी बच्चे होते हैं। कितने लोग अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ा पाएंगे ? ऐसा हाल ही अस्पतालों का है। कितने लोग अपने बच्चों का इलाज प्राइवेट अस्पतालों में करा पाएंगे। जाति धर्म और ऊंच नीच से ऊपर उठकर देश समाज और युवा पीढ़ी के लिए लड़ना होगा। राजनीतिक दलों ने तो देश को गिरवी रखने की पूरी व्यवस्धा कर दी है। सबको अपने वोटबैंक की चिंता है। इनके लिए देश और समाज जाए भाड़ में।






