भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को रद्द करें।
प्रो. सुशीलाताई मोराळे
बीड (महाराष्ट्र) : एमएसपी की कानूनी गारंटी, संपूर्ण कर्जा मुक्ति, चार श्रम विरोधी कानून वापस लेने, मनरेगा योजना बहाल करने, भारत- अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौता रद्द किए जाने सहित तमाम राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियन के संयुक्त आह्वान पर किसान संघर्ष समिति की अगुवाई में किसान संघर्ष समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं महाराष्ट्र प्रदेश संयोजक प्रो सुशीला ताई मोराळे, जिला अध्यक्ष प्रकाश भंसाली के नेतृत्व में आज भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ पर बीड तहसील के नंदुर फाटा पर एक बड़ा ‘सड़क रोको’ विरोध प्रदर्शन किया गया। किसानों और मज़दूरों पर असर डालने वाली इन नीतियों के विरोध में इस कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में किसानों, खेतिहर मज़दूरों, कामगारों और कामकाजी वर्ग के लोगों ने हिस्सा लिया।
इस अवसर पर प्रोफेसर सुशीला ताई मोराळे ने कहा कि मोदी सरकार ने 2014 के लोकसभा चुनाव के अपने घोषणापत्र में किसानों से वादा किया था कि उन्हें उत्पादन लागत और उस पर 50% मुनाफ़ा जोड़कर गारंटीड कीमत दी जाएगी।
किसानों और मज़दूरों ने सरकार को 12 साल तक काम करने का मौका दिया, फिर भी सरकार अपना वादा पूरा करने में नाकाम रही। 2025 में, महाराष्ट्र के 9 ज़िलों—जिनमें बीड भी शामिल है—में बहुत ज़्यादा बारिश हुई; 26 अप्रैल 2026 को सरकार ने एक सरकारी आदेश (GR) जारी करके बीड ज़िले के किसानों के लिए ₹3 करोड़ 6 हज़ार मंज़ूर किए, क्योंकि पूरे महाराष्ट्र में 66,000 किसान प्रभावित हुए थे। उनकी ज़मीन की मिट्टी बह गई, जिससे भारी नुकसान हुआ; मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने हवाई सर्वेक्षण किया और ₹17,500 प्रति हेक्टेयर फसल बीमा मुआवज़े का वादा किया, फिर भी किसान अभी भी भुगतान का इंतज़ार कर रहे हैं। किसानों को पूरी तरह बर्बाद करने और उनकी कृषि भूमि अडानी और अंबानी जैसी बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों को सौंपने की कोशिशें चल रही हैं।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार भारत और अमेरिका के बीच मुक्त व्यापार समझौता शुरू करके किसानों को बर्बाद करने की कोशिश कर रही है। भारत अमेरिका से सोयाबीन और मक्का जैसे कृषि उत्पाद आयात करने जा रहा है, जिससे स्थानीय किसान बंधुआ मजदूरों जैसी स्थिति में आ जाएंगे।
परिणामस्वरूप PM किसान योजना के तहत किसानों को सालाना ₹6,000 देकर सरकार पर निर्भर बनाया जा रहा है।
जिला अध्यक्ष प्रकाश भंसाली ने कहा कि आज भी, ग्रामीण आबादी का 60 प्रतिशत हिस्सा अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है, जिससे न केवल खेतिहर मजदूरों को बल्कि पारंपरिक ग्रामीण कारीगरों और सेवा प्रदाताओं को भी सहारा मिलता है। खेती रोजगार पैदा करने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है, फिर भी इसे पूरी तरह से नजरअंदाज किया जाता है। बीजेपी सरकार ने मनमोहनसिंह सरकार द्वारा शुरू की गई मनरेगा योजना को खत्म कर दिया है। सरकार ने मजदूरों पर चार लेबर कोड थोपकर उन्हें बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया है। इसके अलावा, विकास के नाम पर सरकार सड़क निर्माण के लिए हजारों एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर रही है, जिससे लोग खेती से दूर हो रहे हैं और उन्हें पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जब किसानों के बच्चों को शिक्षा मिलनी शुरू हुई थी, उसी शिक्षा व्यवस्था को अब खत्म किया जा रहा है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में 92,000 स्कूल बंद कर दिए गए हैं। राज्य में हर महीने 35 किसान आत्महत्या कर रहे हैं। कर्ज माफी की घोषणाएं सिर्फ़ एक अस्थायी उपाय के तौर पर की जा रही हैं; ये घोषणाएं केवल कागजों तक ही सीमित हैं और KYC की औपचारिकताएं पूरी किए बिना इनका लाभ नहीं उठाया जा सकता। खाद, बीज और कीटनाशकों पर 18% GST लगाया जा रहा है; इस GST को खत्म किया जाना चाहिए।
प्रोफ़ेसर सुशीलाताई मोराले ने बताया कि सरकार का ध्यान खींचने और सभी माँगें मनवाने के लिए ‘रास्ता रोको’ आंदोलन किया गया; इन माँगों में दोबारा बुआई के लिए प्रति एकड़ ₹10,000 देने का प्रावधान भी शामिल था।
इस अवसर पर पूर्व विधायक जनार्दन तात्या तुपे, प्रकाश भन्साळी, डॉ. सुशील वैद्य, आर डी जाधव, प्रेमचंद कोकाटे, सुधाकर उगलमुगले, जयराम चौरे, मारुती मुंडे, मधुकर पंडित, उमेश वाघ, श्रीकांत चौरे, राजेंद्र दराडे, राहुल हंगे, उत्तम तारळकर, विलास केदार, तुकाराम तांबडे, गणेश मुंडे, लक्ष्मण ढाकणे, बबन आंधळे, अशोक मोराळे. भास्कर दराडे, अंकुश वाघ, पांडुरंग चांगन, सतीश शिंदे,तुकाराम तांबडे, सुरेश हंगे,बळीराम हंगे, सुदाम उगलमुगले, सुभाष चौरे, आत्माराम उगलमुगले, लहू उगलमुगले, बाळू सारूक, अर्जुन करडकर, राजाभाऊ हांडगे, अनिल पाटील, श्रीधर जाधव, संजीवनी इंगोले, रसूल पठाण, तसूर पठाण, रफिक पठाण, आत्माराम परदेशी, राम आंधळे, अशोक मोराळे, बबन मोराळे, केशव किशोर तांदळे, बालु मोराळे, मोहन जाधव, पत्रकार श्रीकांत जाधव, अर्जुन गायकवाड, दया गायकवाड, सटवा सांगळे, बाबुराव मोराळे, कृष्ण पवार, अशोक पवार, अर्जुन पवार, सतीश सोळुंके, अक्षय सोळुंके, राम पवार, बालू बिकड, विलास केदार, केशव केदार, राम केदार, प्रदीप दराडे, नामदेव ढाकणे, वसंत मोराळे, अश्रुबा मोराळे, रामदास हंगे आदि शामिल रहे।





