नई दिल्ली: तमिलनाडु में एमके स्टालिन सरकार के बाद सीएम थलपति विजय जोसेफ की सरकार ने भी राज्य के थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर पवित्र दीपक जलाने के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है। तमिलनाडु सरकार ने इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हालांकि, अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक न लगाकर तमिलनाडु सरकार को पहला झटका दे दिया है।
हाई कोर्ट के आदेश पर रोक नहीं
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम पंचोली ने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ तमिलनाडु की याचिका पर मूल याचिकाकर्ता रामा रवि कुमार और अन्यों को नोटिस जारी किया है, लेकिन उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने से साफ मना कर दिया है।
हाई कोर्ट ने दीप जलाने की दी है अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अन्य लंबित मामलों से जोड़ते हुए सुनवाई आगे के लिए टाल दी है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ की सरकार ने इस मामले में 6 जनवरी के मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के आदेश को चुनौती दी है।
बेंच ने हाई कोर्ट के इस केस में सिंगल बेंच के 1 दिसंबर, 2025 के आदेश को बरकरार रखते हुए तत्कालीन एमके स्टालिन सरकार को झटका दिया था।
सिंगल-जज के आदेश को जायज करार देते हुए डबल बेंच ने 6 जनवरी के आदेश में कहा था कि इस धार्मिक प्रथा की वजह से कानून-व्यवस्था बिगड़ने का डर, असल में अपनी सुविधा के लिए तैयार किया गया एक ‘काल्पनिक भूत’ है।
‘राजनीतिक एजेंडे के लिए इतना न गिरे सरकार’
मद्रास हाई कोर्ट ने साफ कर दिया कि जिस स्थान पर पत्थर का खंभा है, वह जगह श्री सुब्रमण्य स्वामी मंदिर की है और इस मामले में अभी वक्फ बोर्ड की कोई भूमिका नहीं है।
अपने आदेश में हाई कोर्ट ने कहा, ‘यह बेतुकी बात है और इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता कि एक शक्तिशाली सरकार को लगता है यदि साल में किसी एक विशेष दिन देवस्थाम की भूमि पर पहाड़ी की चोटी के पास बने पत्थर के खंभे पर दीपक जलाए जाते हैं तो इससे शांति-व्यवस्था भंग हो जाएगी।’
बेशक ये हो सकता है अगर सरकार खुद ही ऐसी गड़बड़ी करे। हम प्रार्थना करते हैं कि अपने राजनीतिक एजेंडे को प्राप्त करने के लिए कोई भी सरकार इस स्तर तक न गिरे।
मद्रास हाई कोर्ट, मदुरै बेंच
थिरुपरनकुंद्रम पवित्र दीप विवाद क्या है
यह विवाद रामा रविकुमार और अन्य की ओर से दायर रिट याचिका से शुरू हुआ।
याचिका में मांग की गई थी कि नवंबर-दिसंबर में कार्तिकई दीपम त्योहार के मौके पर थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित प्राचीन पत्थर के खंभे पर पवित्र दीपक जलाने की अनुमति दी जाए।
1 दिसंबर, 2025 के हाई कोर्ट के सिंगल जज ने याचिका मंजूर करते हुए त्योहार के दिन अनुष्ठानपूर्वक पवित्र दीप जलाने का आदेश जारी कर दिया।
तब डीएमके की तत्कालीन सरकार ने सिंगल जज के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट की डबल बेंच में अपील दायर की।
स्टालिन सरकार ने तर्क दिया कि वहां पत्थर के स्तंभ पर दीप जलाने से सांप्रदायिक तनाव भड़क सकता है, क्योंकि पास में ही दरगाह मौजूद है।
लेकिन, डबल बेंच ने सिंगल जज के आदेश को कायम रखा और बाद में हुए विधानसभा चुनाव में डीएमकी सरकार सत्ता से चली गई और थलपति विजय की टीवीके ने सरकार बना ली, जो अब हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहुंची है





