राघव चड्ढा को दिल्ली हाई कोर्ट से पाँच सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का आदेश!

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को आंशिक राहत देते हुए उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर प्रसारित पांच पोस्ट हटाने का निर्देश दिया है। अदालत ने प्रथम दृष्टया इन पोस्टों को मानहानिकारक माना, लेकिन उनके व्यक्तित्व अधिकार (Personality Rights) और पब्लिसिटी राइट्स के व्यापक संरक्षण की मांग फिलहाल स्वीकार नहीं की।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की एकल पीठ ने कहा कि पहली नजर में यह मामला व्यक्तित्व अधिकारों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि संभावित मानहानि का है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल पांच पोस्ट ही ऐसी हैं जिन्हें प्रथम दृष्टया मानहानिकारक माना जा सकता है, जबकि अन्य सामग्री के खिलाफ इस स्तर पर कोई कार्रवाई का आधार नहीं बनता।

 

 

क्या है मामला?

 

 

राघव चड्ढा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीर, नाम और पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया। उनका कहना था कि कई पोस्ट में उन्हें इस तरह दिखाया गया, मानो उन्होंने “पैसों के लिए खुद को बेच दिया हो”, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची।

याचिका में यह भी कहा गया कि उनके नाम से एआई आधारित सामग्री, डीपफेक वीडियो, मॉर्फ्ड तस्वीरें, सिंथेटिक वॉयस क्लोनिंग और फर्जी भाषण सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए। उन्होंने अदालत से ऐसी सभी सामग्रियों को हटाने और भविष्य में उनके प्रसार पर रोक लगाने की मांग की थी।

 

 

 

कोर्ट ने क्या कहा?

 

 

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह मामला व्यक्तित्व अधिकारों से अधिक मानहानि से जुड़ा प्रतीत होता है।

अदालत ने कहा, “इस मामले में पर्सनैलिटी राइट्स का प्रश्न नहीं बनता। मैंने केवल पांच दस्तावेज हटाने का आदेश दिया है। बाकी सामग्री पहली नजर में मानहानिकारक नहीं है।”

 

 

पहले भी जताई थी यही राय

 

 

इस मामले में अंतरिम राहत पर फैसला सुरक्षित रखते समय मई में भी हाई कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की थी कि यह मामला किसी व्यक्ति के राजनीतिक फैसले की आलोचना से जुड़ा है, न कि व्यक्तित्व अधिकारों के उल्लंघन से।

अदालत ने तब कहा था कि राजनीतिक निर्णयों की आलोचना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। हालांकि, आलोचना और मानहानि के बीच की सीमा बेहद पतली होती है।

 

 

राघव चड्ढा की दलील

 

 

राघव चड्ढा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर ने अदालत में कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ पोस्ट सामान्य राजनीतिक आलोचना नहीं, बल्कि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने वाली और स्पष्ट रूप से मानहानिकारक हैं।

उन्होंने विशेष रूप से उन मॉर्फ्ड तस्वीरों का उल्लेख किया, जिनमें प्रधानमंत्री को राघव चड्ढा पर नोटों की बारिश करते हुए दिखाया गया था। उनका तर्क था कि एआई से तैयार ऐसी सामग्री अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आती और इससे उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंची है।

 

 

मानहानि का दावा करने की छूट

 

 

हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि राघव चड्ढा इस मामले को मानहानि के रूप में आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो वे अपनी याचिका में आवश्यक संशोधन कर सकते हैं।

फिलहाल अदालत ने केवल पांच सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का निर्देश दिया है, जबकि अन्य सामग्री हटाने और व्यक्तित्व अधिकारों के व्यापक संरक्षण की मांग पर कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत का मानना है कि इस मामले का परीक्षण पर्सनैलिटी राइट्स की बजाय मानहानि के कानूनी दायरे में अधिक उपयुक्त होगा।

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