पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के युद्ध की वजह से दुनियाभर के देशों में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई चेन को जोरदार झटका लगा था। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की आपूर्ति मांग के मुताबिक नहीं हो रही थी, ऐसे में कई देशों ने अपने खपत में कई तरह की कटौतियां शुरू कर दीं थीं। हालांकि, इन्हीं देशों की लिस्ट में भारत एक ऐसा देश था, जिसने इस मुश्किल समय में अपने कूटनीति के जरिए दुनिया के 40 से ज्यादा देशों से ऊर्जा की आपूर्ति को सुनिश्चित किया और देश की जनता को किसी भी तरह के ऊर्जा संकट का एहसास होने नहीं दिया. हालांकि, अब एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने भारत के लोगों के लिए चिंता का एक बड़ा कारण बन गई है।
दरअसल, एक रिपोर्ट में यह दावा किया जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में भारत में ऊर्जा संकट देखने को मिल सकता है, क्योंकि भारत के पास रणनीतिक तेल भंडार इस समय बेहद कम है. दिग्गज वैश्विक कंसल्टेंसी फर्म अर्न्स्ट एंड यंग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के पास सुरक्षित रखे गए तेल भंडारों में सिर्फ 4.9 दिन यानी करीब पांच दिन तक तेल खपत का बैकअप मौजूद है।
40 से ज्यादा देशों से हो रहा तेल आयात, फिर भी कमी का दावा
यह दावा ऐसे समय पर किया जा रहा है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए शांति समझौते के ज्ञापन (MoU) पर साइन किए जा चुके हैं. दूसरी तरफ भारत दुनिया के 40 से ज्यादा देशों से अपने रोजाना तेल खपत का 80 प्रतिशत भाग आयात कर रहा है. वहीं, इस लिस्ट में यूक्रेन के साथ जंग की आग में झूलस रहे रूस का नाम भी शामिल है, जिसका तेल भंडारों पर यूक्रेन की तरफ से लगातार बम बरसाए जा रहे हैं. इन हालातों में भी रूस भारत को कच्चा तेल निर्यात कर रहा है.
रणनीतिक तेल भंडार के मामले में कहां खड़ा है भारत?
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर दुनिया में कोई बड़ा युद्ध छिड़ता है या तेल की सप्लाई चेन में बाधा आती है, तो भारत के पास इस वक्त रणनीतिक तेल भंडार में सिर्फ करीब पांच दिनों का ही कच्चा तेल उपलब्ध है. जबकि पड़ोसी देश चीन के पास 92 दिनों के लिए कच्चे तेल का स्टॉक है. वहीं, जापान के पास 77 दिनों का और दक्षिण कोरिया जैसे देश में करीब 31 दिन का तेल रिजर्व है, लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश भारत में तेल की कमी देखने को मिल सकती है.
रूस से कच्चे तेल का रिकॉर्ड इंपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के साथ जंग में उलझा रूस भारत के लिए ऊर्जा संकट के बीच सबसे बड़ा संकटमोचक बन सकता है. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि क्योंकि भारत ने यूक्रेन युद्ध के शुरुआत के बाद से रूस के रिकॉर्ड मात्रा में कच्चा तेल आयात करना शुरू किया है. वहीं, ताजा आंकड़ों को देखें, तो इसी जून महीने में भारत ने हर रोज रूस से करीब 25 लाख बैरल कच्चे तेल यानी अपने कुल खपत के 50 प्रतिशत से ज्यादा तेल आयात किया है.






