लखनऊ कोचिंग अग्निकांड का मामला राज्य मानवाधिकार आयोग पहुंच गया है। इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग को लेकर राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता ने आयोग से अनुरोध किया है कि वो मामले का संज्ञान लेकर जिला प्रशासन, पुलिस एवं अग्निशमन विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब करे। लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र स्थित कोचिंग संस्थान में सोमवार को भीषण अग्निकांड हुआ था. इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता और मानवाधिकार शोधकर्ता डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई है।
मानवाधिकार आयोग पहुंचा मामला
शिकायत में कहा गया है कि इस अग्निकांड में अनेक छात्रों एवं अन्य व्यक्तियों की मृत्यु हुई। इसके अलावा कई लोगों के घायल होने की सूचना विभिन्न समाचार माध्यमों में प्रकाशित हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई लोगों को अपनी जान बचाने के लिए भवन से कूदना पड़ा जिसमें अनेक लोग धुएं और आग के बीच फंस गए।
यह घटना प्रथम दृष्टया अग्नि सुरक्षा मानकों की संभावित अनदेखी, प्रशासनिक लापरवाही और सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमियों की ओर संकेत करती है। अधिवक्ता ने आयोग से अनुरोध किया है कि वह मामले का संज्ञान लेकर जिला प्रशासन, पुलिस एवं अग्निशमन विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब करे और जांच कराए कि संबंधित भवन एवं कोचिंग संस्थान के पास वैध फायर एनओसी और अन्य आवश्यक अनुमतियां थीं अथवा नहीं।
शिकायतकर्ता ने की विस्तृत जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने मांग की इस मामले में यह भी परीक्षण कराया जाए कि भवन में राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC) और अन्य अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं. शिकायत में यह भी मांग की गई है कि यदि किसी अधिकारी, भवन स्वामी, प्रबंधक अथवा अन्य व्यक्ति की लापरवाही पाई जाती है तो उनके विरुद्ध विधिसम्मत दंडात्मक एवं विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जाए।
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मृतकों के परिजनों एवं घायलों को समुचित मुआवजा और पुनर्वास सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है। डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने कहा कि यदि इस घटना में सुरक्षा मानकों की अनदेखी सिद्ध होती है तो यह केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि नागरिकों के संविधान प्रदत्त जीवन एवं गरिमा के अधिकार (अनुच्छेद 21) के उल्लंघन का गंभीर मामला है। उन्होंने प्रदेश के सभी कोचिंग संस्थानों, छात्रावासों एवं बहुमंजिला व्यावसायिक भवनों का विशेष अग्नि सुरक्षा ऑडिट कराए जाने की भी मांग की है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।







