मजदूरों की गिरफ्तारी पर प्रशासन बेनकाब — 1200 गिरफ्तार, दिखाए लगभग सिर्फ 70 — आंदोलन के दबाव में रिहाई शुरू

नोएडा/गौतम बुद्ध नगर। मजदूरों के खिलाफ चलाए गए दमनचक्र में प्रशासन पूरी तरह बेनकाब हो गया है। किसान संगठनों के जबरदस्त दबाव के बाद आज 200 से अधिक मजदूरों को रिहा करना पड़ा है, जबकि रिहाई अभी भी जारी है।
किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि पुलिस ने करीब 1200 मजदूरों को गिरफ्तार किया, लेकिन सच्चाई छुपाने के लिए करीब 70 गिरफ्तारी दिखाकर जनता को गुमराह किया गया। सैकड़ों बच्चों तक को नहीं बख्शा गया और कई गिरफ्तारियों का कोई रिकॉर्ड या तो मौजूद नहीं है या छुपाया गया है। यह सीधा-सीधा कानून और संविधान की हत्या है। उन्होंने कहा कि सीटू के जिला अध्यक्ष गंगेश्वर दत्त शर्मा को 12 अप्रैल से अवैध नजरबंदी में रखा गया है। बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के किसी नागरिक को कैद करना तानाशाही का खुला उदाहरण है और यह संविधान के जीने के अधिकार पर हमला है।
किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नागर ने कहा कि मजदूरों का शोषण अब चरम पर पहुंच चुका है। 12-12 घंटे काम, कोई ओवरटाइम नहीं, साप्ताहिक अवकाश नहीं, महिलाओं के साथ कार्यस्थल पर यौन शोषण—यह सब खुलेआम चल रहा है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि ₹11,353 की न्यूनतम मजदूरी एक मजाक है, जबकि मजदूर ₹26,000 की मांग कर रहे हैं। ₹11,000 की कमाई में ₹5,000 किराया और ₹3,000 गैस में चला जाता है—बाकी में मजदूर जिए या मरे, सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता।
किसान सभा ने आरोप लगाया कि श्रम कानून लागू कराने वाले अधिकारी खुद फैक्ट्री मालिकों से मिले हुए हैं और रिश्वतखोरी के जरिए मजदूरों के हक कुचल रहे हैं। मजदूरों के जायज गुस्से को दबाने के लिए उसे “नक्सली” और “विदेशी साजिश” बताने की साजिश रची जा रही है।
किसान सभा के उपाध्यक्ष गबरी मुखिया ने कहा कि यह सरकार मजदूरों को इंसान नहीं, बल्कि सस्ता श्रम समझती है। बड़े पूंजीपतियों से चंदा लेकर चलने वाली सरकार और उसके अधिकारी करोड़ों की संपत्ति बना रहे हैं, जबकि मजदूर भूख और कर्ज में डूबा हुआ है।
किसान सभा के जिला महासचिव संदीप भाटीने कहा कि धारा 151 के तहत 24 घंटे से अधिक हिरासत गैरकानूनी है, लेकिन मजदूरों को 5-5 दिन तक कैद रखा गया। करीब 1200 मजदूर, जिनमें 55 महिलाएं भी शामिल हैं, बिना किसी अपराध के जेलों में ठूंस दिए गए।

किसान सभा ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि
सभी मजदूरों को तुरंत रिहा नहीं किया गया,

गंगेश्वर दत्त शर्मा की नजरबंदी खत्म नहीं की गई,

और मजदूरों की ₹26,000 न्यूनतम मजदूरी की मांग नहीं मानी गई,
तो किसान संघर्ष मोर्चा पूरे जिले में आंदोलन छेड़ेगा।

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