किसान संघर्ष मोर्चा के घटक संगठनों—किसान सभा, किसान परिषद एवं किसान एकता संघ—के सैकड़ों कार्यकर्ता जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर जेल में बंद मजदूरों की बिना शर्त रिहाई की मांग करने के लिए एकत्र हुए। इस दौरान किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा को उनके निवास जेपी ग्रींस पर ही पुलिस प्रशासन द्वारा रोक लिया गया। उनके साथ पूर्व जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष उमेश भाटी भी मौजूद थे, उन्हें भी रोक लिया गया। मौके पर डीसीपी प्रवीन रंजन, एडीसीपी सुधीर कुमार, एसीपी एवं थाना बीटा-2 के प्रभारी भारी पुलिस बल के साथ तैनात रहे।

घटना की जानकारी मिलते ही किसान सभा, किसान परिषद और किसान एकता संघ के सैकड़ों कार्यकर्ता जेपी ग्रींस पहुंच गए। नर्मदा गेट पर पुलिस ने उन्हें सोसाइटी में प्रवेश से रोक दिया, जिसके विरोध में अंदर मौजूद किसान भी गेट पर पहुंच गए। इस दौरान पुलिस और किसानों के बीच तीखी बहस, नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन हुआ। सभा को संबोधित करते हुए डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि लगभग 1200 मजदूरों को दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 151 के तहत जिला कारागार में निरुद्ध किया गया है, जबकि यह धारा एक निवारक (Preventive) प्रावधान है, जिसके तहत किसी भी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस जानबूझकर अरेस्ट मेमो छुपा रही है, जिससे मजदूरों को कानूनी सहायता और जमानत मिलने में गंभीर बाधा उत्पन्न हो रही है।
उन्होंने कहा कि इन मजदूरों के परिवार अत्यंत गरीब हैं और अपने परिजनों की तलाश में कचहरी और अन्य स्थानों पर भटक रहे हैं। यह स्थिति कानून के दुरुपयोग और मौलिक अधिकारों के खुले उल्लंघन को दर्शाती है। पूर्व बार अध्यक्ष उमेश भाटी ने कहा कि अधिवक्ता समाज मजदूरों के साथ खड़ा है और पुलिस की तानाशाही का पुरजोर विरोध किया जाएगा। किसान परिषद के नेता उदल आर्य ने कहा कि गौतम बुद्ध नगर में पुलिस का रवैया तानाशाहीपूर्ण हो गया है और यहां आपातकाल जैसे हालात बना दिए गए हैं। मजदूरों और किसानों की जायज मांगों का समाधान करने के बजाय उनके आंदोलनों को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है।
किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान ने कहा कि शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन देना और प्रशासनिक अधिकारियों से मिलना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, जिसे यहां छीन लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की समस्याएं—जैसे 10% प्लॉट, आबादी और नए कानूनों का क्रियान्वयन—आज भी लंबित हैं।
किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नागर ने आरोप लगाया कि कई किसान नेताओं—जैसे जगबीर नंबरदार, अजब सिंह भाटी, प्रशांत भाटी, सुखबीर खलीफा आदि—को गैरकानूनी तरीके से नजरबंद किया गया है, जबकि कानून में नजरबंदी का ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
किसान संगठनों ने एक स्वर में पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए सभी निर्दोष मजदूरों की तत्काल रिहाई की मांग की। इस अवसर पर अशोक भाटी, सुरेंद्र भाटी, देशराज चौहान, नितिन चौहान, सुरेंद्र सिंह पुंडीर, बाबा करतार, नरेश नगर, राहुल नगर, दिनेश शर्मा, मुकुल यादव, बुधपाल यादव, महासचिव संदीप भाटी, अजय पाल भाटी, गुरप्रीत एडवोकेट, जयप्रकाश आर्य सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।







