यह फैसला 2 अप्रैल 2026 के आसपास लिया गया, जिसके बाद पार्टी के अंदरूनी तनाव की चर्चा तेज हो गई है। AAP नेताओं (जैसे आतिशी और सौरभ भारद्वाज) का आरोप है कि राघव चड्ढा BJP से डरते हैं, केंद्र सरकार के खिलाफ सख्ती से नहीं बोलते, शराब घोटाले या अन्य बड़े मुद्दों पर खामोशी बरतते हैं और “सॉफ्ट PR” करते हैं।
राघव चड्ढा की प्रतिक्रिया
राघव चड्ढा ने इस पर पलटवार करते हुए एक्स (ट्विटर) पर एक वीडियो जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा:
“मैं बोलना नहीं चाहता था, मगर चुप रहता तो बार-बार दोहराया गया झूठ भी सच लगने लगता।”
तीन आरोपों का जवाब दिया और कहा कि “Silenced, not defeated” (खामोश किया गया हूं, लेकिन हारा नहीं)।
उन्होंने आम आदमी के मुद्दों (जैसे गिग वर्कर्स, मोबाइल डेटा रोलओवर, प्रदूषण, एयरफेयर आदि) पर संसद में अपनी बात रखने का वीडियो शेयर किया।
अब क्या करेंगे राघव चड्ढा?
फिलहाल स्पष्ट नहीं: कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है कि वे AAP छोड़ेंगे या कोई नया कदम उठाएंगे। वे अभी राज्यसभा सांसद बने हुए हैं और पार्टी सदस्यता पर कोई कार्रवाई की खबर नहीं है।
अटकलें: मीडिया और सोशल मीडिया में चर्चा है कि वे AAP में बने रह सकते हैं या फिर इस्तीफा देकर कोई अन्य रास्ता चुन सकते हैं। कुछ लोग BJP में शामिल होने की अटकलें लगा रहे हैं (कुछ पुराने वीडियो और बयानों के आधार पर), लेकिन यह सिर्फ़ अफवाहें हैं—राघव चड्ढा ने खुद इस पर कुछ नहीं कहा।
कुछ विश्लेषण यह भी कह रहे हैं कि वे संसद में स्वतंत्र रूप से आम आदमी के मुद्दे उठाते रहेंगे या पार्टी के अंदर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेंगे।
यह मामला अभी काफी ताज़ा है (अभी 3-4 अप्रैल 2026 के आसपास की खबरें), इसलिए स्थिति बदल सकती है। अगर वे कोई बड़ा बयान या फैसला लेते हैं, तो जल्द ही खबर आएगी।







