2 अप्रैल 2026 को अमेरिका ने ईरान के अल्बोर्ज प्रांत (तेहरान के पास कराज शहर) में निर्माणाधीन B1 हाईवे ब्रिज पर हमला किया। यह पुल लगभग 136 मीटर ऊंचा और 1050 मीटर लंबा था, जो तेहरान को पश्चिमी इलाकों से जोड़ता था। हमले में 8 लोगों की मौत और 95 से ज्यादा घायल होने की खबर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद वीडियो शेयर कर इसे “ईरान का सबसे बड़ा पुल” बताया और चेतावनी दी कि “और भी बहुत कुछ आने वाला है” तथा ईरान को “समझौता कर लेना चाहिए”।
ईरानी मीडिया (खासकर फार्स न्यूज एजेंसी) ने इसके जवाब में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की ओर से इन 8 पुलों को संभावित लक्ष्य के रूप में सूचीबद्ध किया है। इसे “टिट-फॉर-टैट” (प्रतिकार) की रणनीति माना जा रहा है।
हिट लिस्ट में शामिल प्रमुख पुल
ईरान की सूची (अनादोलु एजेंसी और विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार) में ये पुल हैं:
कुवैत: शेख जाबेर अल-अहमद अल-सबाह समुद्री पुल (Sheikh Jaber Al-Ahmad Al-Sabah Sea Bridge)।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE): शेख जायद पुल (Sheikh Zayed Bridge), अल मकता पुल (Al Maqta Bridge), शेख खलीफा पुल (Sheikh Khalifa Bridge)।
सऊदी अरब-बहरीन: किंग फहद कॉजवे (King Fahd Causeway) — दोनों देशों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण पुल।
जॉर्डन: किंग हुसैन पुल (King Hussein Bridge), दामिया पुल (Damia Bridge), अब्दौन पुल (Abdoun Bridge)।
ये पुल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, व्यापार, तेल परिवहन और नागरिक आवागमन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन पर हमला होने से खाड़ी क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है।
वर्तमान संदर्भ
यह घटना ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के विस्तार का हिस्सा है, जो फरवरी 2026 से चल रहा है। ईरान ने पहले भी खाड़ी देशों (UAE, सऊदी, बहरीन, कुवैत आदि) में अमेरिकी ठिकानों और बुनियादी ढांचे पर हमले किए हैं। अब पुलों को निशाना बनाने की धमकी क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा रही है।
खाड़ी देश (Gulf Cooperation Council) पहले से ही ईरान की मिसाइल, ड्रोन और प्रॉक्सी हमलों से सतर्क हैं। इस लिस्ट को प्रचारात्मक धमकी माना जा रहा है, लेकिन अगर अमल में लाया गया तो इससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से लेकर पूरे मध्य पूर्व में तेल की आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
क्या आगे होगा?
ट्रंप की तरफ से और हमलों (पुलों और बिजली प्लांट्स) की चेतावनी जारी है।
ईरान कह रहा है कि नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले उसे समर्पण नहीं कराएंगे।
क्षेत्रीय देशों (UAE, सऊदी, कुवैत आदि) में सुरक्षा बढ़ाई जा रही है, लेकिन कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं कि ये पुल वाकई निशाने पर हैं या सिर्फ मनोवैज्ञानिक दबाव है।
यह स्थिति बेहद संवेदनशील है और आगे की घटनाएं (मिसाइल हमले, डिप्लोमेसी या और एस्केलेशन) पर निर्भर करेगी। वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें और शिपिंग रूट्स पहले से प्रभावित हैं।
नोट: ये जानकारी मुख्य रूप से ईरानी मीडिया, अनादोलु, NDTV, Jagran, IndiaTV जैसी रिपोर्ट्स पर आधारित है। युद्धकाल में सूचनाएं तेजी से बदल सकती हैं, इसलिए विश्वसनीय स्रोतों से अपडेट चेक करें।








