सहयोगी देशों के साथ देने से इनकार करने पर बौखलाए हुए हैं ट्रम्प
ब्रिटेन ने स्टेट ऑफ़ होमुर्ज को खुलवाने किए लिए बुलाई 35 देशों की बैठक
चरण सिंह
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की स्थिति लौट के बुद्धू घर को आये वाली होने वाली है। इजरायल से हमला कराकर उसका साथ देकर ईरान को सरेंडर कराने चले थे। अब पीछा छुड़ाना मुश्किल हो गया है। सहयोगी देशों ने भी टकरा दिया है। अब ट्रम्प अमेरिका को नाटो से बाहर निकालने की बात कर कर रहे हैं। ब्रिटेन ने स्टेट ऑफ़ होर्मुज को खुलवाने के लिए 35 देशों की बैठक बुला ली है। चौधराहट भी खतरे में पड़ गई है। न तो ईरान ने सरेंडर किया। न ही कोई शर्त मानी और न ही स्टेट ऑफ़ होमुर्ज ही खुला। सहयोगी देश बिर्टेन, स्पेन, फ़्रांस, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया सभी ने अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया है। बेचारे को इज्जत बचानी मुश्किल पड़ गई है। अब ट्रम्प हमारे पीएम को युद्ध में घसीट सकते हैं। वैसे भी वह गत दिनों मोदी और खुद मिलकर सबको देख लेने की बात कर चुके हैं। ऊपर से ईरान ने अमेरिका की कंपनियों को बंद करने की धमकी दे दी है।
अब हमारे प्रधानमंत्री जी को देखना है कि विदेश नीति पर कुछ करंट भी दिखाते हैं या फिर ऐसे ही ढुलमुल रवैया अपनाए रहते हैं। नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रम्प का प्रयास होगा कि मोदी अब खुलकर उनके साथ आएं। क्या मोदी दूसरे देशों की तरह डोनाल्ड ट्रम्प से इंकार कर पाएंगे ? यदि मोदी ने इस युद्ध में भारत की विदेश नीति को बदल दिया है तो स्पष्ट करें। जनता को बताएं कि इस्रायल और अमेरिका के साथ रहने से भारत को क्या लाभ हैं। रूस और ईरान के साथ रहने से क्या नुकसान हैं। अब पीएम मोदी को अपनी विदेश नीति स्पष्ट करनी पड़ेगी। क्योंकि ईरान ने जो तेल और गैस के टैंकर भारत भेंजे हैं वे सरकार नहीं बल्कि जनता के सहयोग की वजह से भेजे हैं।
दरअसल ईरान और इजरायल युद्ध में पीएम मोदी ने जिस तरह से युद्ध के एक दिन पहले इजरायल गए, ईरान के सुप्रीम लीडर के मारे जाने पर शोक व्यक्त नहीं किया। स्कूल पर हमला करने और 162 बच्चियों के मारने की निंदा नहीं की। ऐसे में मोदी ने भारत को इजरायल और अमेरिका के साथ खड़ा कर दिया है।








