नाराज हो सकते हैं आजम खान के समर्थक
चरण सिंह
नई दिल्ली। किसी समय मायावती के खास नेता माने जाने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने आखिरकार अपने समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पार्टी में लेने के पीछे राजनीतिक पंडित सपा प्रमुख अखिलेश यादव की सपा के कद्दावर नेता आजम खान की जगह भरने की रणनीति मान रहे हैं।
ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या नसीमुद्दीन सिद्दीकी सपा में आजम खान की जगह ले पाएंगे ? क्या सपा कार्यकर्ता आजम खान की जगह नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पचा पाएंगे ? क्या आजम खान के समर्थक अखिलेश यादव के इस निर्णय से नाराज नहीं होंगे ?
दरअसल बीएसपी सपा के कार्यकर्ताओं के एक दूसरे के प्रति पुराने घाव हैं। बीएसपी राज में सपा कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न होता था तो सपा राज में बीएसपी कार्यकर्ताओं का। 2007 में जब मायावती ने अपने दम पर सरकार बनाई थी तो नसीमुद्दीन सिद्दीकी को मिनी चीफ मनिस्टर माना जाता था। नसीमुद्दीन सिद्दीकी के पास लगभग एक दर्जन मंत्रालय हुआ करते थे। उस समय सपा कार्यकर्ताओं को टारगेट पर लिया गया था। क्या सपा कार्यकर्ता पुराने बातों को भूल जाएंगे ?
दरअसल नसीमुद्दीन सिद्दीकी का सपा में आने के इतना फायदा होता दिख नहीं रहा है जितना नुकसान। नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में जाने के बाद आजम खान के समर्थकों में गुस्सा देखा जा रहा है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में जाने के बाद आजम खां के समर्थकों में यह संदेश गया है कि अखिलेश यादव आजम खान के पक्ष में आंदोलन न कर उनकी जगह को भरने का प्रयास कर रहे हैं।
दरअसल आजम खान इमरजेंसी से निकले नेता है। मुलायम सिंह यादव की तरह ही उन्होंने भी चौधरी चरण सिंह से राजनीति ककहरा सीखा है। उनकी भाषण शैली मुस्लिमों को प्रभावित करती रही है। वह बात नसीमुद्दीन सिद्दीकी में नहीं दिखाई देती है। वैसे भी सपा में प्रो राम गोपाल यादव और शिवपाल के चलते किसी अन्य नेता की कुछ खास नहीं चल पाती है। आजम खान तो सपा संस्थापक के साथ भारतीय क्रांति दल से जुड़ गए थे। वह जनता पार्टी में भी उनके साथ रहे। जनता दल में भी और जब मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी का गठन किया तो आजम खान मुख्य नेताओं में से थे। भले ही अमर सिंह के चलते उनका पार्टी से निष्कासन कर दिया गया था पर उन्होंने कोई दूसरी पार्टी ज्वाइन नहीं की। आजम खान का रिकार्ड रहा है कि नेताजी का दामन उन्होंने किसी भी परिस्थिति में भी नहीं छोड़ा।
अब जान बीजेपी ने उन्हें टारगेट किया है तो समाजवादी पार्टी उनके बचाव नहीं आई। यहां तक कि जब मुलायम सिंह यादव जिन्दा थे उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आजम खान के पक्ष में सड़कों पर उतरने का आह्वान किया गया पर अखिलेश यादव ने आंदोलन नहीं किया। यह पीड़ा आजम खान और उनके परिवार की ओर से कई बार व्यक्त की जा चुकी है।
ऐसे में सपा के मुस्लिम समर्थक आजम खान की जगह नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पसंद करेंगे। इसकी संभावना कम ही है। हो सकता है कि स्वामी प्रसाद मौर्य की तरह नसीमुद्दीन सिद्दीकी को ही सपा कार्यकर्ता पचा ही न पाएं। दरसदल 2017 में नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने मायावती का दामन छोड़ कांग्रेस का हाथ थम लिया था। उनको पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई थी। सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद के चलते नसीमुद्दीन सिद्दीकी को कम तवज्जो मिल रही थी। गत दिनों नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस छोड़ दी। अंदाजा लगाया जा रहा था नसीमुद्दीन सिद्द्की चंद्रशेखर आज़ाद के साथ हाथ मिला सकते हैं पर असदुद्दीन ओवैसी के चंद्रशेखर के साथ गठबंधन की चल रही अटकलों के बीच नसीमुद्दीन सिद्द्की साईकिल पर सवार हो गए।






