मुंबई और दिल्ली में रह रहे लोगों पर भी दर्ज कराया गया है मामला
यूजीसी एक्ट के खिलाफ सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री भले ही एससी एसटी एक्ट के खिलाफ अभियान छेड़ रहे हों पर बिहार में एससी एसटी एक्ट के दुरूपयोग को लेकर एक बहस छिड़ गया है। दरअसल दरभंगा जिले के हरिहर गांव में एक दलित परिवार का आरोप है कि उनसे मजदूरी कराइ गई पर लगभग पौने तीन लाख रुपए का भुगतान नहीं किया है। जब भुगतान मांगा गया तो उनके साथ मारपीट की गई। गाली गलौज की गई। मतलब एक छोटा-सा विवाद अब बड़े जातीय तनाव और कानूनी मामले में बदल गया है। घटना 30 जनवरी के आसपास की बताई जा रही है, और अब यह खबर पूरे राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई है।
क्या हुआ था?
जब पैसे मांगने पर विवाद बढ़ा, तो मारपीट हुई, जिसमें महिलाएं और एक बच्ची भी घायल बताई गई हैं। दलित पक्ष ने जातिसूचक गाली-गलौज और सामूहिक अत्याचार का आरोप लगाया।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के तहत FIR दर्ज की।
FIR के विवरण
70 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है (ज्यादातर ब्राह्मण समुदाय के)। 100-150 अज्ञात लोगों को भी शामिल किया गया, जिससे कुल आरोपी 200 से अधिक (कुछ रिपोर्टों में 210-220 तक) हो जाते हैं। आरोप है कि पूरे ब्राह्मण समुदाय ने मिलकर “सामूहिक शोषण” किया।
पुलिस ने अब तक 12-17 लोगों को गिरफ्तार किया है या हिरासत में लिया है। गांव में तनाव है, इसलिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
विवादास्पद पहलू
FIR में कई ऐसे नाम शामिल हैं जो घटना के समय गांव में मौजूद ही नहीं थे। कई लोग दिल्ली, मुंबई आदि शहरों में मजदूरी या नौकरी कर परिवार चला रहे हैं। एक पक्ष इसे SC/ST एक्ट के दुरुपयोग का मामला बता रहा है, जहां एक आर्थिक विवाद को जातिगत रंग देकर पूरे समुदाय को निशाना बनाया गया।
दूसरा पक्ष (शिकायतकर्ता) इसे जातिगत अत्याचार और सामूहिक हमले का मामला मान रहा है।
यह घटना SC/ST एक्ट के इस्तेमाल और दुरुपयोग को लेकर बहस छेड़ रही है, खासकर जब आरोपी संख्या इतनी बड़ी है और कई दूर-दराज के लोग शामिल हैं। यह मामला अभी जांच के दौर में है और आगे की कार्रवाई पुलिस/कोर्ट पर निर्भर करेगी। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में संख्या और विवरण में थोड़ा अंतर है, लेकिन मुख्य बात यही है कि एक मजदूरी विवाद अब जातीय और कानूनी संघर्ष बन चुका है।








