चरण सिंह
चाहे सत्ता पक्ष और या फिर विपक्ष दोनों ओर की ही पार्टियां सत्ता की भूखी हैं। इन्हें देश और समाज से कोई लेना देना नहीं है। सत्ता के लिए ये नेता किसी भी पार्टी से हाथ मिला सकते हैं। जनहित में तो ये लोग मिल नहीं पाते पर सत्ता के लिए सब कुछ अच्छा हो जाता है। महाराष्ट्र निकाय चुनाव में ही देख लो। एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप की भरमार लगाने वाली पार्टियां बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही अंबरनाथ में एक हो गई। जब बवाल मचा तो अलग होने का नाटक भी कर दिया।
अंबरनाथ में भाजपा संग गठबंधन के चलते कांग्रेस ने अपने 12 निर्वाचित पार्षदों को निलंबित भी कर दिया। क्या हुआ ? जिस मकसद से यह गठबंधन हुआ था वह तो पूरा हो गया। ये 12 निलंबित पार्षद भाजपा में शामिल हो गए। मतलब एकनाथ शिंदे को अंबरनाथ की सत्ता से दूर करने के लिए भाजपा-कांग्रेस का गठबंधन हुआ था। जिसमें बीजेपी सफल रही। अब तस्वीर ऐसी बन रही है कि शिंदे सत्ता से दूर तो रहेंगे।
दरअसल महाराष्ट्र की सियासत में यह नया खेल देखने को मिला है। कांग्रेस-मुक्त भारत का नारा लगाने वाली भाजपा ने ठाणे के अंबरनाथ नगर परिषद में कांग्रेस से हाथ मिला लिया है। भाजपा ने शिवसेना के शिंदे गुट को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस के साथ सत्ता का रास्ता चुन लिया था। अंबरनाथ नगर परिषद में हुए राजनीतिक घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। शिंदे गुट को सत्ता से दूर रखने के लिए भाजपा ने अंबरनाथ में सीधे कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर सत्ता का रास्ता चुन लिया था।
शिंदे गुट को दरकिनार करते हुए अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा-कांग्रेस का एक अप्रत्याशित गठबंधन साकार हुआ था। इस गठबंधन की बदौलत भाजपा बहुमत की ओर बढ़ रही थी। इस गठबंधन की वजह से ही भाजपा की तेजश्री करंजुले ने अंबरनाथ नगर परिषद में महापौर का पद जीता है।
खेल देखिये कि कुल 32 पार्षदों के गठबंधन से भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिल जाएगा। इसमें भाजपा के 14, कांग्रेस से आए 12 और एनसीपी (अजीत पवार समूह) के 4 पार्षद शामिल हैं। इस गठबंधन को ‘अम्बरनाथ विकास अघाड़ी’ नाम दिया गया है। इन घटनाक्रमों से शिवसेना शिंदे समूह में भारी असंतोष है। शिवसेना शिंदे समूह ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए इस गठबंधन को ‘अभद्र युति (गठबंधन)’ बताया है।
शिंदे गुट के विधायक नाराज
शिंदे समूह के विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने कांग्रेस-मुक्त भारत की बात करने वाली भाजपा पर कांग्रेस के साथ गठबंधन करके शिवसेना पर हमला करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस-मुक्त भारत की घोषणा करने वाली भाजपा ने ठाणे के अम्बरनाथ में नगर परिषद में कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया है. इस गठबंधन को शिवसेना ने पीठ में छुरा घोंपने जैसा है. वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।
शिंदे गुट ने किया भाजपा पर पलटवार
भाजपा उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल ने शिंदे समूह पर पलटवार करते हुए कहा है कि अगर वे पिछले पच्चीस वर्षों से भ्रष्टाचार में लिप्त शिंदे समूह के साथ सत्ता में होते तो यह एक बेहद ही अनुचित गठबंधन न होता। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने अंबरनाथ नगर परिषद के लिए शिंदे समूह के साथ महागठबंधन पर कई बार चर्चा करने की कोशिश की, लेकिन उनके नेताओं से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इस गठबंधन से किसे टेंशन एक ओर जहां भाजपा-कांग्रेस गठबंधन अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता के बंटवारे को स्पष्ट कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इस गठबंधन ने महायुति और महागठबंधन में तनाव पैदा कर दिया है. अंबरनाथ में यह अनुचित गठबंधन अनुचित है या अपरिहार्य, इस पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप आने वाले समय में और भी तेज होने की संभावना है. लेकिन यह बात सच है कि एकनाथ शिंदे को यह फैसला जरूर खटका होगा।






