अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी सेना ने 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला की राजधानी काराकस में एक सैन्य ऑपरेशन किया। इस दौरान मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लेकर न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां उन पर ड्रग तस्करी और नार्को-टेररिज्म के आरोपों में मुकदमा चल रहा है। ट्रंप ने इसे “नार्को-टेररिस्ट” को पकड़ने की बड़ी सफलता बताया।
चीन का ‘सदाबहार दोस्त’ कौन?
चीन वेनेजुएला को अपना “ऑल-वेदर स्ट्रैटेजिक पार्टनर” (सदाबहार रणनीतिक साझेदार) मानता है। चीन ने वेनेजुएला में अरबों डॉलर का निवेश किया है, खासकर तेल क्षेत्र में, और वेनेजुएला का ज्यादातर तेल निर्यात चीन जाता है। यह गिरफ्तारी चीन के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि यह उसके लैटिन अमेरिका में प्रभाव को चुनौती देती है।
UN में टकराव
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की इमरजेंसी मीटिंग में चीन और रूस ने अमेरिका की कड़ी निंदा की। चीन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और मादुरो की तत्काल रिहाई की मांग की। UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी कि यह कदम “खतरनाक मिसाल” बन सकता है। कई देशों (जैसे कोलंबिया, दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान) ने भी अमेरिकी कार्रवाई को गलत ठहराया।
अमेरिका को चेतावनी
चीन ने अमेरिका को खुली चेतावनी दी है कि वह मादुरो को रिहा करे और वेनेजुएला की संप्रभुता का सम्मान करे। चीन ने कहा कि कोई देश “विश्व पुलिस” या “विश्व जज” नहीं बन सकता। उत्तर कोरिया और रूस ने भी अमेरिका की आलोचना की है। यह घटना वैश्विक तनाव बढ़ा रही है, और चीन अपने ग्लोबल साउथ प्रभाव को बचाने की कोशिश कर रहा है।







