3 जनवरी को सुबह-सुबह वेनेजुएला की राजधानी काराकस और अन्य इलाकों में जोरदार धमाके हुए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर घोषणा की कि अमेरिका ने वेनेजुएला पर “बड़े पैमाने पर सैन्य हमला” किया है, जिसमें राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को “पकड़ लिया गया” और देश से बाहर ले जाया गया। ट्रंप ने इसे अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर किया गया ऑपरेशन बताया और कहा कि यह सफल रहा।
यह हमला ठीक उसी समय हुआ जब कुछ दिन पहले ही मादुरो ने एक इंटरव्यू में अमेरिका से बातचीत की इच्छा जताई थी। नए साल की पूर्व संध्या पर रिकॉर्ड किए गए इंटरव्यू में (जो 1-2 जनवरी को प्रसारित हुआ), मादुरो ने कहा था कि वे ड्रग तस्करी, तेल और अन्य मुद्दों पर अमेरिका से “गंभीर बातचीत” करने को तैयार हैं – “कहीं भी, कभी भी”। उन्होंने अमेरिकी आरोपों को खारिज किया और कहा कि अगर अमेरिका वाकई ड्रग तस्करी रोकना चाहता है तो वेनेजुएला सहयोग करने को तैयार है। मादुरो ने ट्रंप की सैन्य धमकियों को “अवैध युद्धोन्माद” करार दिया था और शांतिपूर्ण संवाद की अपील की थी।
पृष्ठभूमि: ट्रंप प्रशासन महीनों से मादुरो पर दबाव बना रहा था – ड्रग तस्करी के आरोपों में नावों पर हमले, तेल टैंकरों की नाकाबंदी और सैन्य तैनाती। मादुरो के इस इंटरव्यू को कई लोग बातचीत का संकेत मान रहे थे, लेकिन इसके ठीक बाद यह बड़ा सैन्य ऑपरेशन हो गया।
वेनेजुएला सरकार ने इसे “साम्राज्यवादी हमला” करार दिया है, राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया और मादुरो के ठिकाने की जानकारी न होने की बात कही। उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने ट्रंप से मादुरो दंपति की “जीवित होने का सबूत” मांगा। क्यूबा और ईरान ने हमले की निंदा की, जबकि कुछ देशों ने चुप्पी साधी है।
यह घटना लैटिन अमेरिका में 1989 के पनामा इनवेजन जैसी याद दिलाती है। आगे की स्थिति पर दुनिया की नजरें टिकी हैं – ट्रंप ने मार-ए-लागो से प्रेस कॉन्फ्रेंस का ऐलान किया है।







