यूरिया का संकट : सरकारी दफ्तर में ‘मनोकामना पर्चियां’ बांधने को मजबूर हुए किसान

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में यूरिया खाद की भारी किल्लत के कारण किसान बेहद परेशान हैं। रबी फसल की बुआई के मौसम में खाद न मिलने से त्रस्त किसान अब सहकारी विपणन समिति के कार्यालय में मंदिर की तरह ‘मनोकामना पर्चियां’ बांध रहे हैं। यहां किसान अपने आधार कार्ड और जमीन की पट्टी की फोटोकॉपी की प्रतियां धागे से एक रस्सी पर बांधकर रख रहे हैं, ताकि अगले दिन नंबर मिल सके। यह सिलसिला पिछले चार दिनों से चल रहा है।

 

घटना का विवरण

 

क्या हो रहा है? सुबह 8 बजे से किसान लंबी-लंबी कतारों में लग जाते हैं। दस्तावेजों को जमीन पर रखकर पत्थरों से दबा दिया जाता है, ताकि हवा से उड़ न जाएं। शाम को ये पर्चियां धागे से बांध दी जाती हैं, ठीक वैसे ही जैसे मंदिर में मन्नत चढ़ाई जाती है। यह तरीका अपनाने का कारण यह है कि कार्यालय में सीमित मात्रा में खाद उपलब्ध होती है, और नंबर न खोने के लिए किसान यह उपाय कर रहे हैं।
कारण: यूरिया खाद की कमी। ठंड के मौसम में गेहूं जैसी रबी फसलों के लिए खाद जरूरी है, लेकिन सप्लाई चेन में बाधा के चलते किसानों को चार-चार दिन इंतजार करना पड़ रहा है। कभी-कभी एक किसान को सिर्फ 1-2 कट्टे (क्विंटल) ही मिल पाते हैं, जबकि जरूरत इससे कहीं ज्यादा है।
किसानों की परेशानी: किसान थक-हारे और निराश हैं। एक किसान दिलीप सिंह ने बताया, “दो-तीन दिन से लाइन में लग रहा हूं, रोज यही हाल है। समिति के अपने नियम हैं—कभी चार कट्टे देते हैं, कभी एक। अब तो वह भी नहीं मिल रहा।” वहीं, शिव सिंह चौहान ने कृषि विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया, “लंबी लाइनें विभाग की देन हैं, जो किसानों की मदद नहीं कर रहा।”

 

अधिकारियों का पक्ष

 

मार्केटिंग प्रबंधक गंगाधर दांगी का दावा है कि “यूरिया पर्याप्त है, रोज वितरण हो रहा है।” उन्होंने बताया कि शुक्रवार को 150 टन खाद आई थी, जो बांटी जा रही है। एक किसान को दो कट्टे दिए जा रहे हैं, और जो नंबर में बच जाते हैं, उन्हें अगले दिन प्राथमिकता मिलती है।
कालाबाजारी रोकने के लिए जमीन की पट्टी की फोटोकॉपी मांगी जा रही है। कार्यालय में पीने का पानी का इंतजाम भी किया गया है, लेकिन भीड़ के कारण अफरा-तफरी मच जाती है—शुक्रवार को 11 बजे खिड़की खुलते ही हंगामा हो गया, और पुलिस तैनात करनी पड़ी।

 

व्यापक संदर्भ

 

यह समस्या सिर्फ खिलचीपुर तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश समेत राजस्थान, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में यूरिया संकट गहरा गया है। किसान प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि समय पर खाद न मिलने से फसल बर्बाद होने का खतरा है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि सप्लाई बढ़ाई जाएगी, लेकिन जमीनी स्तर पर राहत नजर नहीं आ रही। यदि यह जारी रहा, तो बड़े विरोध की आशंका है।

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