केस का बैकग्राउंड
घटना का समय: 1999 में अमिताभ ठाकुर देवरिया के सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (एसपी) थे।
मुख्य आरोप: ठाकुर पर अपनी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम पर जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) से एक औद्योगिक प्लॉट का फर्जी दस्तावेजों के जरिए आवंटन कराने का आरोप है। इसमें फर्जी नाम, पते, आवेदन फॉर्म, शपथ पत्र, ट्रेजरी चालान और ट्रांसफर डीड का इस्तेमाल किया गया।
लाभ: प्लॉट को बाद में बेचकर मुनाफा कमाया गया। ठाकुर ने अपनी आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग कर सुरक्षा और सहायता प्रदान की, जिससे यह धोखाधड़ी संभव हुई।
शिकायत और एफआईआर
शिकायतकर्ता: लखनऊ के राजाजीपुरम निवासी संजय शर्मा ने शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने राष्ट्रपति को भी पत्र लिखा था। एफआईआर: 12 सितंबर 2025 को ताल कोटरा थाने में एफआईआर दर्ज हुई। एक अन्य केस देवरिया सदर कोतवाली में क्राइम नंबर 1021/25 के तहत दर्ज किया गया।
धारा: आईपीसी की धारा 419 (धोखा देने के लिए व्यक्ति का प्रतिरूपण), 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान सुरक्षा की जालसाजी), 468 (धोखे के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज का असली के रूप में उपयोग), 34 (साझा इरादे से कार्य) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत।
हालिया गिरफ्तारी और कोर्ट प्रक्रिया
गिरफ्तारी: 10 दिसंबर 2025 को सुबह करीब 3:45 बजे सितापुर-महोली बॉर्डर पर लखनऊ पुलिस ने ठाकुर को गिरफ्तार किया। वे लखनऊ से दिल्ली जा रही ट्रेन (लखनऊ-दिल्ली एसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस) में शाहजहांपुर पुलिस के हवाले किए गए थे।
कोर्ट: उसी दिन देवरिया की चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मंजू कुमारी के समक्ष पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अन्य डिटेल: ठाकुर ने खुद को अदालत में पेश किया और अपनी जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की। उन्होंने जेल में चश्मा, पेन, पेपर आदि की सुविधा और व्यक्तिगत सुरक्षा का अनुरोध किया। कोर्ट के बाहर भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।








