शुरुआती संघर्ष: पहली हार से राजनीति में एंट्री
1989 में बारह लोकसभा सीट से जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर ब्रेकथ्रू मिला। वीपी सिंह सरकार में कृषि एवं सहकारिता राज्यमंत्री बने। लेकिन लालू प्रसाद यादव के उदय के बाद, मंडल कमीशन की आरक्षण नीति (जो यादवों को फायदा पहुंचाती थी) पर असहमति हुई। नीतीश कुर्मी जैसे गैर-यादव ओबीसी को मजबूत करना चाहते थे।
पार्टी निर्माण और राष्ट्रीय भूमिका
टर्मतारीखअवधिगठबंधनप्रमुख घटना13 मार्च 20007 दिनएनडीएबहुमत साबित न कर इस्तीफा; सबसे छोटा टर्म।224 नवंबर 20052010 तकएनडीए (बीजेपी के साथ)लालू राज समाप्त; सुशासन शुरू।320102014 तकएनडीएभूस्खलन जीत; लड़कियों के लिए साइकिल योजना।422 फरवरी 2015कुछ महीनेमहागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस)जीतन राम मांझी को हटाया।520 नवंबर 20152017 तकमहागठबंधन2015 विधानसभा जीत; तेजस्वी यादव डिप्टी।627 जुलाई 20172020 तकएनडीएआरजेडी से अलगाव; भ्रष्टाचार आरोप पर इस्तीफा।716 नवंबर 20202022 तकएनडीए2020 चुनाव में संकरी जीत; चिराग पासवान की चुनौती।810 अगस्त 20222024 तकमहागठबंधनएनडीए छोड़कर वापसी; जाति सर्वे शुरू।928 जनवरी 20242025 तकएनडीएमहागठबंधन से अलगाव; सम्राट चौधरी डिप्टी।1020 नवंबर 2025वर्तमानएनडीए2025 विधानसभा चुनाव में 85 सीटें; रिकॉर्ड 10वीं शपथ।
नीतीश के गठबंधन पलटवार उनकी रणनीति का हिस्सा रहे। 2013 में मोदी के नाम पर एनडीए छोड़ा, 2015 में लालू से गठजोड़ किया, 2017 में वापस बीजेपी के साथ, 2022 में फिर महागठबंधन, और 2024 में एनडीए। 2025 चुनाव में एनडीए की भारी जीत के बाद 10वीं बार शपथ ली, जो बिहार के बाहर अभूतपूर्व है। स्वास्थ्य अफवाहों और पार्टी विभाजन की चर्चाओं के बावजूद, विकास और महिला योजनाओं ने उन्हें बचा लिया।
उपलब्धियां: सुशासन का चेहरा
नीतीश ने बिहार को लुटिया डुबोने वाले राज्य से विकास की राह पर डाला:
कानून-व्यवस्था: आर्म्स एक्ट लागू, विशेष सहायक पुलिस, भ्रष्टाचार पर विशेष सतर्कता इकाई; अपराध दर घटी।
महिला सशक्तिकरण: पंचायतों में 50% आरक्षण (20% ईबीसी के लिए), लड़कियों को साइकिल व भोजन योजना; ड्रॉपआउट दर आधी।
ग्रामीण विकास: जीविका प्रोजेक्ट (11 लाख स्वयं सहायता समूह), दीदी की रसोई।
शिक्षा-स्वास्थ्य: 1 लाख शिक्षक नियुक्त, डॉक्टरों की तैनाती; महिला अशिक्षा आधी।
इंफ्रास्ट्रक्चर: गांवों का विद्युतीकरण, सड़कें; बिहारी आय दोगुनी।
अन्य: शराबबंदी, पोलियो उन्मूलन, राजगीर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स।
विवाद: पलटवार और आलोचना
नीतीश को ‘सियासत के सिकंदर’ कहा जाता है, लेकिन गठबंधन बदलने पर ‘पलटू राम’ की उपाधि मिली। 2023 में महिलाओं की शिक्षा पर विवादास्पद बयान (बाद में माफी), 2025 में राष्ट्रगान का कथित अपमान। 2014 लोकसभा हार, 2020 में चिराग पासवान की चुनौती ने उन्हें हिलाया। फिर भी, वे जीडी(यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
आज 74 वर्षीय नीतीश बिहार के सबसे लंबे समय तक सीएम हैं। 2025 की 10वीं शपथ ने साबित किया कि सियासत में हार अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत है। उनकी कहानी प्रेरणा है—संघर्ष से सत्ता तक का सफर।








