साली से प्यार, जीजा का कत्ल और कब्र से झांकते दो पांव… पुलिस ने ऐसे सुलझाई नरसिंहपुर हत्याकांड की गुत्थी

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में हाल ही में एक सनसनीखेज हत्याकांड ने पूरे इलाके को हिला दिया। यह कहानी है प्रेम संबंधों की उलझन, ब्लैकमेल की धमकी और सोशल मीडिया रील्स से प्रेरित एक क्रूर साजिश की। साली निधि साहू ने अपने जीजा सृजन साहू की हत्या की साजिश रची, जो पत्थरों के नीचे दबे शव से झांकते दो पैरों तक पहुंची। पुलिस ने महज चार दिनों में इस गुत्थी को सुलझा लिया। आइए, पूरी घटना को कालानुक्रमिक रूप से समझते हैं।

प्रेम संबंधों की शुरुआत और ब्लैकमेल का जाल

सृजन साहू (35 वर्ष), नरसिंहपुर के एक युवक, की शादी निधि साहू की चचेरी बहन से हुई थी। लेकिन शादी से पहले सृजन और निधि के बीच अवैध प्रेम संबंध थे। शादी के बाद भी सृजन ने निधि से संपर्क बनाए रखा और उसके पास निधि की निजी तस्वीरें थीं। वह इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर निधि को ब्लैकमेल करता रहा। निधि, जो ब्लैकमेल से तंग आ चुकी थी, ने अपने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए सृजन की हत्या का प्लान बनाया।

साजिश का जन्म: रील्स से ली प्रेरणा, ‘उधार की सुपारी’

निधि ने सोशल मीडिया पर हत्या से जुड़ी रील्स और वीडियो देखे, जिनमें फिल्मी स्टाइल में कत्ल के तरीके दिखाए गए थे। इससे प्रेरित होकर उसने सुपारी दी—50 हजार रुपये में सृजन का कत्ल कराने का सौदा। पैसे न होने पर निधि ने अपने कान के टॉप्स गिरवी रख दिए और एडवांस में 10 हजार रुपये दिए। सुपारी लेने वाले थे साहिल (एक युवक) और एक नाबालिग लड़का। निधि ने खुद दो चाकू खरीदे, जो हत्या के हथियार बने।

25 अक्टूबर: हत्या का अमल

निधि ने सृजन को मिलने के बहाने बुलाया। सृजन अपनी स्विफ्ट डिजायर कार से पहुंचा। निधि, साहिल और नाबालिग के साथ चारों शहर से 40 किमी दूर मंगवानी के जंगलों की ओर निकले। बहाना था कि रास्ते में किसी जानकार को उठाना है। जैसे ही कार जंगल में घुसी, निधि ने सृजन के गले पर चाकू से वार किया। उसके बाद साहिल और नाबालिग ने भी कई वार किए। सृजन की मौके पर मौत हो गई। हत्यारों ने शव को दफ्न करने की कोशिश की, लेकिन मिट्टी का गड्ढा न खोद पाने पर भारी पत्थरों से दबा दिया। गलती से शव के दोनों पैर बाहर रह गए, जो बाद में पुलिस के लिए सुराग बने। सृजन घर से निकलते समय बोला था कि ‘कुछ जरूरी काम है’, लेकिन लौटा नहीं। उसका फोन भी स्विच ऑफ हो गया।

26 अक्टूबर: गुमशुदगी की शिकायत

सृजन के परिवार ने मंगवानी थाने में लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की।

27-28 अक्टूबर: पुलिस की तेज रफ्तार जांच

पुलिस ने सृजन के मोबाइल की आखिरी लोकेशन ट्रैक की, जो हाईवे नंबर 44 के पास एक रेस्टोरेंट पर थम गई। सीसीटीवी फुटेज में सृजन को निधि (चेहरे पर कपड़ा लपेटे) और साहिल के साथ कार में जाते दिखा। कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर) से तीनों की लोकेशन जंगल के पास मिली। सृजन का फोन जंगल में घुसते ही नेटवर्क से बाहर हो गया था, जिससे हत्या का शक पक्का हो गया। पुलिस ने कई टीमें गठित कीं—एक ने ट्रैकिंग की, दूसरी ने संदिग्धों की तलाश। निधि और साहिल को हिरासत में लिया गया। शुरुआत में दोनों ने इनकार किया, लेकिन सख्त पूछताछ में कबूल लिया कि उन्होंने हत्या की है और शव जंगल में पत्थरों के नीचे दफ्न है। नाबालिग का भी खुलासा हुआ।

शव बरामदगी: 13 घंटे का डरावना सर्च

आरोपियों ने शव की सटीक जगह बताने में टालमटोल की। पुलिस ने डॉग स्क्वाड, ड्रोन और भारी फोर्स के साथ शाम 5 बजे सर्च शुरू किया। यह ऑपरेशन अगली सुबह 6:30 बजे तक चला। आखिरकार, पुलिस उस जगह पहुंची जहां पत्थरों के नीचे से दो पैर झांक रहे थे। यह नजारा इतना खौफनाक था कि पुलिसकर्मी सिहर उठे। पत्थर हटाए जाने पर चार दिनों पुराना सृजन का शव बरामद हुआ।

केस का समाधान

पुलिस ने निधि, साहिल और नाबालिग के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया। यह ‘उधार की सुपारी’ वाला केस बन गया, क्योंकि सुपारी गिरवी जेवरों से जुटाई गई थी। निधि ने पूछताछ में रील्स देखकर साजिश रचने की बात कबूली। चार दिनों में सुलझे इस केस ने पुलिस की तारीफ बटोरी, लेकिन सोशल मीडिया के खतरनाक प्रभाव को भी उजागर किया। सृजन का परिवार न्याय की राह पर है, जबकि आरोपी जेल की सलाखों के पीछे।

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