राजस्थान की अंता विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव ने कांग्रेस में पुरानी दरारों को फिर से उजागर कर दिया है। यहां “सिर्फ एक का नाम क्यों?” वाली बहस का केंद्र बिंदु यही है—कांग्रेस ने पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया (अशोक गहलोत खेमे से जुड़े) को टिकट दिया, जबकि सचिन पायलट समर्थक युवा नेता नरेश मीणा को नजरअंदाज कर दिया गया। नरेश मीणा ने पहले ही कहा था कि अगर पायलट को राजस्थान कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जाता, तो वे चुनाव नहीं लड़ते। इस फैसले ने पायलट गुट में नाराजगी पैदा कर दी, और सोशल मीडिया पर #नरेश_मीणा_को_टिकट_दो जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
क्या हुआ था?
टिकट घोषणा (7-8 अक्टूबर 2025): कांग्रेस हाईकमान ने अंता उपचुनाव के लिए भाया का नाम फाइनल किया। यह सीट 2023 विधानसभा चुनाव में भाजपा के कंवरलाल मीणा ने जीती थी, लेकिन अब उपचुनाव में कांग्रेस वापसी की कोशिश में है।
नरेश मीणा की नाराजगी: मीणा ने टिकट कटने पर गहलोत और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “मैं पायलट के साथ हूं, इसलिए मेरा टिकट कटा। डोटासरा पेपरलीक मामले में आरोपी हैं और जेल जाने से बचने के लिए भाजपा से सांठ-गांठ कर रहे हैं।” मीणा ने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में नामांकन भरने का ऐलान किया।
सचिन पायलट का बयान (8 अक्टूबर): पायलट ने देवली-उनियारा में एक रैली के दौरान कहा, “कांग्रेस ने सोच-समझकर उम्मीदवार चुना है। हम जीतने के लिए लड़ रहे हैं। जनता भाजपा की वादाखिलाफी से नाराज है। जब पंचायत चुनाव होंगे, तो कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिलेगा।” उन्होंने मीणा के नाम पर सीधे टिप्पणी नहीं की, लेकिन कहा कि पार्टी का फैसला सर्वोपरि है।
सोशल मीडिया पर बवाल क्यों?
पायलट समर्थकों ने इसे “एक खेमे का दबदबा” बताते हुए हमला बोला। कई पोस्ट्स में लिखा, “सिर्फ गहलोत गुट का नाम क्यों? पायलट की मेहनत का फल क्यों नहीं मिलता?” मीणा के समर्थकों ने पायलट को टैग कर टिकट की मांग की।
मीणा ने खुद कहा कि वे पायलट के सम्मान में चुनाव लड़ेंगे, लेकिन यह फैसला कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकता है। सोशल मीडिया पर मीणा के वीडियो वायरल हो रहे हैं, जहां वे कहते हैं, “अगर पायलट अध्यक्ष बनते, तो मैं निर्दलीय नहीं लड़ता।”
विपक्ष (भाजपा) ने इसे कांग्रेस की “आंतरिक कलह” बताकर मजा लिया। पूर्व मंत्री अतुल प्रदीप राठौड़ ने दावा किया कि अंता में भाजपा की जीत पक्की है।
कांग्रेस में अंदरूनी जंग तेज क्यों?
पुरानी दुश्मनी: 2020 के राजस्थान संकट के बाद गहलोत-पायलट के बीच तनाव कम नहीं हुआ। 2023 चुनाव में पायलट गुट को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला, जिससे कई विधायक नाराज हैं।
2028 की तैयारी: अंता उपचुनाव को 2028 विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। मीणा जैसे युवा चेहरे को नजरअंदाज करने से पायलट गुट में असंतोष बढ़ा है। पायलट ने एकता का संदेश दिया, लेकिन समर्थक इसे “समझौता” बता रहे हैं। संभावित असर: मीणा निर्दलीय लड़ेंगे, जिससे वोट स्प्लिट हो सकता है। कांग्रेस आलाकमान (राहुल गांधी) ने हस्तक्षेप की कोशिश की, लेकिन मीणा ने साफ कहा—बिना पायलट को मजबूत किए कुछ नहीं।
पहलूगहलोत गुट का पक्षपायलट गुट का पक्षटिकट उम्मीदवारप्रमोद जैन भाया (2023 में हारे, लेकिन वफादार)नरेश मीणा (युवा, पायलट समर्थक, स्थानीय प्रभाव)तर्कपार्टी फैसला, जीत की रणनीतिगुटबाजी, युवाओं की अनदेखीसोशल मीडिया रिएक्शनसमर्थन कम, लेकिन चुप्पी#नरेश_को_टिकट_दो ट्रेंडिंग, नाराजगी
पायलट ने 15 अक्टूबर को अंता में भाया के समर्थन में रैली की, जहां गहलोत, डोटासरा समेत सभी नेता पहुंचे। लेकिन मीणा का निर्दलीय फैसला जंग को और तेज कर सकता है। उपचुनाव 25 अक्टूबर को है—क्या कांग्रेस एकजुट दिखेगी या दरारें फैलेंगी? वक्त बताएगा।







