घटना का विवरण
स्थान और समय: मौतें अगस्त से अक्टूबर 2025 के बीच हुईं, ज्यादातर छिंदवाड़ा जिले में। कुछ मामले राजस्थान से भी जुड़े बताए जा रहे हैं। कारण: सिरप में मिलाया गया डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (जो स्याही या ब्रेक फ्लूइड जैसे उत्पादों में इस्तेमाल होता है) बच्चों में उल्टी, पेट दर्द, पेशाब बंद होना, दौरा पड़ना और अंततः मौत का कारण बना। बच्चे सर्दी-खांसी के इलाज के लिए डॉक्टर द्वारा सुझाए गए इस सिरप का सेवन कर रहे थे।
पीड़ित बच्चे: ज्यादातर 3 से 7 साल के बच्चे थे। उदाहरण के लिए:
सरकारी कार्रवाई:
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त कार्रवाई का वादा किया; राज्य ने प्रभावित परिवारों को 4 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की। केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया कि बच्चों को कफ सिरप न दें, क्योंकि फायदे कम और जोखिम ज्यादा हैं। ICMR ने भी सलाह जारी की।
एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) जांच कर रही है। सिरप का निर्माता तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स है। यह घटना 2020 में जम्मू-कश्मीर की घटना से मिलती-जुलती है, जहां भी कफ सिरप से मौतें हुई थीं। परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं, और यह मामला दवा परीक्षण प्रक्रिया में खामियों को उजागर करता है। यदि आपको और अपडेट या विशिष्ट जानकारी चाहिए, तो बताएं।







