नेपाल में हाल ही में Gen-Z युवाओं के बड़े आंदोलन ने पुरानी सरकार को उखाड़ फेंका। इस आंदोलन के प्रमुख चेहरे सुदन गुरुंग ने नई अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की को सत्ता की कुर्सी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन PM बनते ही दोनों के बीच तनाव पैदा हो गया। गुरुंग ने खुलेआम बगावती तेवर अपनाते हुए कहा, “जिसको मैं प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बिठा कर आया हूं, उसको बाहर निकलने में मुझे अधिक समय नहीं लगेगा”। यह बयान 14 सितंबर 2025 को आया, जब गुरुंग नई सरकार से बेहद नाराज नजर आए। आइए समझते हैं कि आखिर यह सब क्यों हुआ।
सुदन गुरुंग कौन हैं? आंदोलन के नायक
पृष्ठभूमि: 36 वर्षीय सुदन गुरुंग “हामी नेपाल” नामक एनजीओ के अध्यक्ष हैं, जो युवाओं के अधिकारों और सामाजिक मुद्दों पर काम करता है। वे सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और Gen-Z आंदोलन के केंद्र में रहे।
आंदोलन में भूमिका: नेपाल में पूर्व PM केपी शर्मा ओली सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर लगाए गए बैन के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शनों को गुरुंग ने संगठित किया। उन्होंने छात्रों से स्कूल यूनिफॉर्म पहनकर सड़कों पर उतरने की अपील की, जिससे आंदोलन तेजी से फैला। हिंसक झड़पों में 30 से अधिक मौतें हुईं और संसद भवन सहित कई सरकारी इमारतों में आग लगाई गई। गुरुंग के नेतृत्व में ओली को इस्तीफा देना पड़ा।
सुशीला कार्की का चयन: आंदोलनकारियों ने अंतरिम PM के लिए पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की का नाम चुना। गुरुंग ने उनके शपथग्रहण के दौरान उनके पैर छुए, जो सम्मान का प्रतीक था। कार्की ने आंदोलनकारियों की 5 शर्तें मानीं, जैसे भ्रष्टाचार मुक्त सरकार, जल्द चुनाव और युवाओं को प्रतिनिधित्व।
बगावत के मुख्य कारण: PM से न मिलना और मृतकों के परिजनों की अनदेखी
सुशीला कार्की के शपथग्रहण (12 सितंबर 2025) के महज दो-तीन दिनों बाद ही सुदन गुरुंग का गुस्सा फूट पड़ा। मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:
कारणविवरणPM से मुलाकात न होनागुरुंग बार-बार PM कार्की से मिलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका। गुरुंग का मानना है कि उन्होंने कार्की को सत्ता दिलाई, लेकिन अब उन्हें साइडलाइन किया जा रहा है।प्रदर्शन में मारे गए युवाओं के परिजनों की अनदेखीआंदोलन के दौरान मारे गए 30+ युवाओं के परिवारों को PM से मिलवाने के लिए गुरुंग ने कई प्रयास किए, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इससे युवाओं में असंतोष बढ़ा, और गुरुंग ने इसे “धोखा” करार दिया।मंत्रिमंडल चयन में युवाओं को नजरअंदाजनई सरकार में मंत्रियों के चयन में पुराने चेहरों को प्राथमिकता मिली। गुरुंग और Gen-Z नेताओं को लगता है कि उनका योगदान भुला दिया गया। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि गुरुंग को मंत्री पद की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें दरकिनार किया गया।सामान्य असंतोषनई सरकार बनने के बाद भी भ्रष्टाचार और युवा प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर कोई ठोस कदम नहीं उठा। गुरुंग ने चेतावनी दी कि अगर सुधार न हुए, तो आंदोलन फिर से शुरू हो सकता है।
राजनीतिक संदर्भ: अस्थिरता का नया दौर
कार्की की पृष्ठभूमि: 73 वर्षीय सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस (2016-2017) रहीं। वे भारत से जुड़ी हैं—उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से राजनीति विज्ञान में मास्टर्स किया। उनके पति नेपाली कांग्रेस नेता दुर्गा प्रसाद सुबेदी हैं। भारत ने उनकी नियुक्ति का स्वागत किया है।
वर्तमान स्थिति: कार्की अंतरिम सरकार चला रही हैं, जिसका मुख्य काम 3 महीने में चुनाव कराना है। लेकिन गुरुंग जैसे युवा नेताओं का विरोध नई सरकार के लिए चुनौती है। कुछ Gen-Z गुटों में कार्की को “भारत समर्थक” बताकर विरोध भी हो रहा है, हालांकि गुरुंग ने शुरू में उनका समर्थन किया था।
संभावित प्रभाव: गुरुंग का बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, और युवाओं में फिर से आंदोलन की आशंका बढ़ गई। नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता जारी है, जहां सेना सुरक्षा संभाल रही है।
यह घटना नेपाल की युवा शक्ति को दर्शाती है, जो पुरानी राजनीति से तंग आ चुकी है। गुरुंग का तेवर साफ संकेत देता है कि सत्ता में युवाओं की भागीदारी न मिलने पर बगावत तय है। स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए आगामी दिनों पर नजर रखें।







