सरकार जन आंदोलन के दबाव में फिर पहुंची सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट से फिर से मांगा पैसा
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के अनुरोध पर फिर सहारा सेवी के खाते से दिया 5000 करोड़
सुप्रीम कोर्ट ने 5000 करोड़ फिर दिया सरकार को
जन आंदोलन मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय देव ने लगाया सरकार पर आरोप , कहा सरकार 20000 करोड़ की जगह 5000 हजार करोड़ मांग कर निवेशकों के साथ किया छलावा
बिहार चुनाव में वोटरों को प्रभावित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से लाया पैसा
सेवी के खाते से पैसा रिलीज करवा कर अन्य स्कीमों में लिए गए खाता धारियों के साथ अन्याय
सुप्रीम कोर्ट भी दोषी सहारा सेवी के खाते से क्यों रिलीज किया सी आरसीएस को पैसा
सुप्रीम कोर्ट ने किया सहारा कंपनी और निवेशकों के साथ पक्षपात
जब वह पैसा सीआर सीएस का था तो क्यों सुब्रत राय को किया था गिरफ्तार
कंपनी पर क्यों लगाया था सेवी ने फिर क्यों लगाया था सहारा इंडिया पर ब्लैक मनी के पैसे लेने का आरोप
आखिर इतनी बड़ी कंपनी को क्यों किया तबाह
आखिर सेवी के द्वारा जप्त किए गए पैसे क्यों सीआर सीएस को किया रिलीज
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पक्षपात पूर्ण
आज दिल्ली में पत्रकारों को संबोधित करते हुए जन आंदोलन मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय देव शुक्ल सुप्रीम कोर्ट और सरकार पर भड़क गए
उन्होंने कहा कि सेवी सरकार के इशारे पर एक कंपनी के ऊपर आरोप लगाती है फिर सुप्रीम कोर्ट जाती है और सुप्रीम कोर्ट कंपनी और निवेशकों को 13 साल उलझा कर रखती हुई कंपनी को तबाह करके रख देती है उसके निवेशक कंपनी के एजेंटों को परेशान कर डालते हैं उन्हें आत्म हत्या करने पर विवश होना पड़ता है लेकिन सुप्रीम कोर्ट नहीं पिघलती है
लेकिन सुप्रीम कोर्ट सरकार के चुनावी फायदे के लिए उसी सेवी के खाते से सेवी के पैसे सी आर सी को हस्तांतरित कर देती है जो कि किसी भी तरीके से न्याय संगत नहीं है या तो सुप्रीम कोर्ट सहारा को क्लीन चिट दे दे या फिर अपराधी बना कर जेल के सलाखों के पीछे भेज दे
लेकिन अन्याय पूर्ण फैसले से सुप्रीम कोर्ट अपनी साख और गरिमा मत गिराए नहीं तो देश के लोगों से न्याय पर से विश्वास घट जाएगा
सुप्रीम कोर्ट को कुत्तों पर स्वतः लेना आता है लेकिन 13 करोड़ उपभोक्ता और 12 लाख एजेंटों की पीड़ा सुनने का समय नहीं है क्या यही है भारत की न्याय पालिका का न्याय
जन आंदोलन मोर्चा सरकार और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का विरोध करता है
अभय देव शुक्ल राष्ट्रीय अध्यक्ष संयुक्त आल इंडिया जन आंदोलन संघर्ष न्याय मोर्चा








