शिव मंदिर को लेकर थाईलैंड और कंबोडिया में युद्ध, भारत देगा किसका साथ ?

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच हाल ही में प्रीह विहार (Preah Vihear) और ता मुएन थोम (Ta Moan Thom) नामक प्राचीन शिव मंदिरों को लेकर सीमा विवाद युद्ध के रूप में भड़क गया है। यह विवाद इन मंदिरों के स्वामित्व और आसपास की 4.6 वर्ग किलोमीटर भूमि को लेकर है, जो दोनों देश अपनी सीमा में होने का दावा करते हैं।

 

प्रीह विहार मंदिर

 

यह 11वीं सदी का हिंदू मंदिर है, जो खमेर साम्राज्य के राजा सूर्यवर्मन प्रथम द्वारा भगवान शिव को समर्पित बनवाया गया। यह डोंगरेक पर्वत श्रृंखला पर कंबोडिया के प्रीह विहार प्रांत और थाईलैंड के सिसाकेत प्रांत की सीमा पर स्थित है।
1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने मंदिर को कंबोडिया का हिस्सा घोषित किया, लेकिन आसपास की भूमि पर विवाद बना रहा। थाईलैंड ने इस फैसले को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया।aajtak.inlivehindustan.com
2008 में यूनेस्को द्वारा मंदिर को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने के बाद तनाव बढ़ा, जिसके कारण 2011 में भी हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें 18 लोग मारे गए और हजारों विस्थापित हुए।

 

 

ता मुएन थोम मंदिर:

 

यह मंदिर भी खमेर साम्राज्य द्वारा बनवाया गया और कंबोडिया के ओदार मांचेय प्रांत और थाईलैंड के सुरीन प्रांत की सीमा पर स्थित है। इसमें प्राकृतिक शिवलिंग स्थापित है, जो इसे धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।hindi.news18.com
मई 2025 में दोनों देशों ने तनाव कम करने के लिए केवल पांच-पांच सैनिक तैनात करने पर सहमति बनाई थी, लेकिन यह

 

समझौता टूट गया

 

हाल की घटनाएँ (जुलाई 2025):

23 जुलाई 2025 को सीमा पर एक लैंडमाइन विस्फोट में पांच थाई सैनिक घायल हुए, जिसके बाद दोनों देशों ने अपने राजदूतों को वापस बुला लिया और एक-दूसरे पर गोलीबारी शुरू कर दी।aajtak.inaajtak.in
24 जुलाई को कंबोडिया ने ड्रोन और बीएम-21 रॉकेटों से हमला किया, जबकि थाईलैंड ने F-16 लड़ाकू विमानों से जवाबी कार्रवाई की, जिसमें कंबोडिया के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
अब तक कम से कम 14-34 लोग मारे गए हैं (ज्यादातर नागरिक), 46 घायल हुए हैं, और 40,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। थाईलैंड के सिसाकेत और सुरीन प्रांतों में गैस स्टेशन, अस्पताल, और प्रीह विहार मंदिर को भी नुकसान पहुंचा है।

विवाद की जड़

 

ऐतिहासिक रूप से, खमेर साम्राज्य (9वीं-15वीं सदी) का इन क्षेत्रों पर नियंत्रण था, और ये मंदिर उसी समय बनाए गए। कंबोडिया खुद को खमेर वंशज मानता है, जबकि थाईलैंड इसे अपनी हिंदू विरासत का हिस्सा मानता है।
1907 में फ्रांसीसी औपनिवेशिक शासन द्वारा बनाए गए नक्शों में प्रीह विहार को कंबोडिया का हिस्सा दिखाया गया, जिसे थाईलैंड ने खारिज कर दिया।
दोनों देशों में राष्ट्रवादी भावनाएँ और कमजोर नेतृत्व इस तनाव को बढ़ा रहे हैं। कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेट ने संयुक्त राष्ट्र से आपात बैठक की मांग की है, जबकि थाईलैंड इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सुलझाने की बात कह रहा है।

भारत और क्षेत्रीय प्रभाव:

 

भारत ने दोनों देशों के साथ सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध बनाए रखे हैं, लेकिन इस विवाद में तटस्थ रहने की संभावना है ताकि उसकी “Act East Policy” प्रभावित न हो।jansatta.com
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस तनाव का फायदा चीन को मिल सकता है, क्योंकि कंबोडिया पहले से ही चीन का करीबी सहयोगी है, और थाईलैंड में भी चीन के बड़े निवेश हैं।

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