उपराष्ट्रपति का चुनाव लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों (निर्वाचित और मनोनीत दोनों) से मिलकर बने एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत एकल हस्तांतरणीय मत (single transferable vote) के माध्यम से होता है, और मतदान गुप्त होता है। अधिसूचना जारी होने के बाद, आमतौर पर 30 दिनों के भीतर मतदान की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
चुनाव की प्रक्रिया में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु शामिल हैं:
निर्वाचक मंडल: लोकसभा (543 सदस्य, 1 रिक्त) और राज्यसभा (245 सदस्य, 5 रिक्त) के सदस्य, जिनकी कुल प्रभावी संख्या 786 है। जीत के लिए उम्मीदवार को कम से कम 394 वोट चाहिए।
पात्रता: उम्मीदवार को भारत का नागरिक होना चाहिए, 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो, और राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए योग्य हो। वह कोई लाभ का पद नहीं रख सकता।
नामांकन: उम्मीदवार को कम से कम 20 सांसदों द्वारा प्रस्तावक और 20 अन्य सांसदों द्वारा समर्थक के रूप में नामांकित किया जाना चाहिए। साथ ही, ₹15,000 की जमानत राशि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में जमा करनी होती है।
रिटर्निंग ऑफिसर: चुनाव आयोग, केंद्र सरकार के परामर्श से, लोकसभा या राज्यसभा के महासचिव को रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त करता है, जो बारी-बारी से होता है।
चुनाव आयोग द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद, नामांकन, मतदान, और मतगणना की तारीखों का ऐलान किया जाएगा। संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति पद रिक्त होने पर यथासंभव जल्दी चुनाव कराया जाना चाहिए, और नया उपराष्ट्रपति पूरे पांच साल के कार्यकाल के लिए चुना जाएगा।
हालांकि, अभी तक चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि यह प्रक्रिया 24 घंटों के भीतर शुरू हो सकती है।






