-पुनौरा धाम बना भाजपा की तुरुप की चाल
-चुनावी जीत के लिए धार्मिक पर्यटन और विकास का नया कार्ड
दीपक कुमार तिवारी
पटना। बिहार की राजनीति में सीतामढ़ी जिला इस बार एनडीए के लिए विशेष महत्व रखता है। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए रणनीतिकार अब “8 टू 6” नहीं, बल्कि “8 टू 8” की सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं। यानी पिछले चुनाव में जीती गई 6 सीटों के साथ अब बेलसंड और बाजपट्टी पर भी कब्जा जमाने की तैयारी है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भाजपा और जदयू मिलकर एक सधी हुई रणनीति पर काम कर रही हैं।
पुनौरा धाम बना गेमचेंजर:
एनडीए के मिशन 8 टू 8 की रणनीति में पुनौरा धाम बड़ा चुनावी कार्ड बनकर उभरा है। राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मां सीता की जन्मस्थली के समग्र विकास के लिए ₹882.87 करोड़ की योजना की घोषणा कर सियासी हलचल मचा दी है। इस परियोजना से न केवल धार्मिक पर्यटन को गति मिलेगी, बल्कि हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
पुनौरा धाम के 67 एकड़ भूमि पर विकसित किए जा रहे नए तीर्थक्षेत्र में आधुनिक मूलभूत सुविधाएं, परिवहन, आवासीय और व्यापारिक ढांचे का विस्तार होगा। जानकी मंदिर के उन्नयन के लिए ₹137.34 करोड़ और रख-रखाव व प्रबंधन के लिए ₹16.62 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी जा चुकी है।
2020 की स्थिति और 2025 का प्लान
2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को सीतामढ़ी जिले की 8 में से 6 सीटों पर सफलता मिली थी:
सीट जीतने वाला दल (2020)
रीगा भाजपा
परिहार भाजपा
सीतामढ़ी भाजपा
बथनाहा भाजपा
सुरसंड जदयू
रुन्नीसैदपुर जदयू
बेलसंड राजद (संजय गुप्ता)
बाजपट्टी राजद (मुकेश यादव)
एनडीए को झटका बेलसंड और बाजपट्टी से मिला था, लेकिन इस बार इन दोनों सीटों पर जीत दर्ज कर “क्लीन स्वीप” करने का लक्ष्य तय किया गया है।
रणनीतिक समीकरण:
एनडीए की रणनीति साफ है – धार्मिक भावनाओं का सम्मान + विकास की घोषणाएं + जातीय संतुलन। पुनौरा धाम की परियोजना जहां हिंदू आस्था को केंद्र में रखकर जनमानस को साधने का प्रयास है, वहीं रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए युवाओं और मध्यम वर्ग को भी जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
विपक्ष के लिए चुनौती:
राजद और महागठबंधन के लिए यह स्थिति चिंता का कारण है। बेलसंड और बाजपट्टी जैसी सीटें जहां पहले जीती गई थीं, वहां पुनः पकड़ बनाए रखना आसान नहीं होगा। खासकर जब एनडीए पुनौरा धाम को “भावनात्मक विकास कार्ड” के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
सीतामढ़ी में एनडीए की रणनीति केवल विकास की नहीं, बल्कि धर्म, रोजगार और राजनीतिक गणित के त्रिकोण पर आधारित है। यदि यह दांव चलता है, तो 2025 में “8 टू 8” का सपना हकीकत बन सकता है।






